दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : त्याग से मनुष्य को जीवन में सफलता मिलती है। चाहे वह मोह - माया का त्याग हो अथवा धन - वैभव और ऐश्वर्य की। जब तक मनुष्य त्याग नहीं करेंगे , तब तक कभी सफलता नहीं मिल सकती। उक्त बातें सातपट्टी कुर्माडीह में चल रहे श्रीराम कथा के चौथे दिन अयोध्या से पधारे प्रेमशरण महाराज ने कही। कथावाचक ने रामजन्मोत्सव की कथा के बाद भगवान के शिक्षा - दीक्षा की कथा सुनाया। बताया कि राजा दशरथ ने पुत्र मोह का त्याग कर महर्षि विश्वामित्र के साथ शिक्षा लेने चले गए। वहां ताड़का नामक राक्षसी का वध किया। फिर स्वयंवर में जाकर जनकनंदनी सीता को प्राप्त किया। दूसरे सत्र में कथावाचक ने भक्ति पर भी विस्तार से फोकस किया। बताया कि भक्ति के मार्ग में तीन बाधाएं आती है। प्रथम बाधा क्रोध है। राम ने ताड़का को क्रोध बताया। दूसरी बाधा जड़ता रूपी बुद्धि ।कथावाचक ने अहिल्या को जड़ता बताया। अंतिम बाधा अहंकार है।कथावाचक ने बताया कि भगवान ने ताड़का का वध कर अहंकार का नाश किया और अहिल्या का उद्धार कर जड़ता रूपी बुद्धि को उजागर किया। फिर धनुष की तरह अहंकार को तोड़ा।तब जाकर जनक नंदनी की प्राप्ति हुई। मनुष्य को भी तीनों बाधाओं को पार करने की जरूरत है। तभी जाकर शिखर की प्राप्ति होगी। कथा के बीच - बीच में भागवत भजन सुन श्रोता झूमने और नाचने पर विवश हैं। आयोजन की सफलता में सभी ग्रामवासी सक्रिय हैं।


0 Comments
आप सभी हमें अपना कॉमेंट / संदेश भेज सकते हैं...