दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : स्थानीय सीएचसी परिसर के समीप सातपट्टी कुर्माडीह में चल रहे श्रीराम कथा के छठे दिन अयोध्या से पधारे कथावाचक प्रेमशरण ने राम- सीता विवाह का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव - विभोर कर दिया।उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि राम - सीता विवाह वैदिक और धार्मिक परंपराओं को भी जीवंत करती है। राजा जनक के स्वयंवर में धनुष भंग करने के बाद महर्षि विश्वामित्र ने बताया कि स्वयंवर के नियम और शर्तों के अनुसार राम - सीता का विवाह हो गया। अब दोनों पक्षों के गुरूजनों , ब्रह्मणों और बुजुर्गों से बातचीत कर शादी की तिथि का निर्धारण करें। तब बसंत पंचमी के दिन राम- जानकी का विवाह संपन्न हुआ। कथावाचक ने बताया कि आज के दौर में धार्मिक और वैदिक परंपराओं का विलोप हो रहा है। बगैर सोचे - विचारे प्रेम - विवाह कर लेते हैं। फिर बाद में जीवन नर्क बनना शुरू हो जाता है। कथावाचक ने बताया कि राम - सीता विवाह में अटूट प्रेम के बाद त्याग दिखाती है। जब राम पिता की आज्ञा से वन जाने लगे तो सीता भी राजमहल का त्याग कर ईमानदारी से भगवान के साथ वन चली गई। वैवाहिक जीवन में मानव को राम - जानकी विवाह से सीख लेने की जरूरत है। कथा के बीच - बीच में भागवत भजन सुन श्रोता झूमने , नाचने पर विवश हैं। कथा सुनने कुर्मा के अलावा लालमणिचक , वंशीपुर , रायपुरा , बाजार चटमा , करसोप इत्यादि अन्य गांवों के लोगों की भीड़ लग रही है।


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