बांका:विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के छठे दिन भी कुछ जगहों पर अव्यवस्था की स्थिति देखी गयी। देर शाम को कांवरिया पथ पर कई जगहों की स्थिति ऐसी थी की कांवरिया को टार्च या मोबाइल की रोशनी में अपनी यात्रा करनी पड़ रही है। ऐसा ही नजारा गोड़ियारी और तीनसीमानी मोड़ के बीच कई जगह देखा गया। इसके अलावा भी कुछ जगहों पर भीषण अंधेरे में बोलबम के जयकारे के साथ कांवर लेकर कांवरिया आगे बढ़ रहे है। इतना ही नहीं कांवरिया पथ का सबसे महत्वपूर्ण और अत्यधिक भीड़ वाली नदी में पानी से होकर गुजरने वाली जगहों पर बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है।माना जाता है कि गंगाधाम से चल कर यहां तक आने वाले कांवरिया की सारी थकान गोड़ियारी नदी के पानी मे उतरते ही खत्म हो जाती है। इस नदी में उतर कर कांवरिया फोटोग्राफी का भी आंनद लेते है। इस दौरान पूरे नदी में कहीं भी बिजली या लाइट की व्यवस्था नहीं की गई है जिससे कांवरिया को नदी भी अंधेरे में ही पार होना पड़ता है। अधिक पानी रहने की स्थिति में कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। जबकि पूर्व के जिला अधिकारी द्वारा इस नदी में चारों तरफ लाइट की व्यवस्था के साथ-साथ चेंजिंग रूम बनाने का भी आश्वासन दिया गया था। जहां महिलाएं स्नान करने के बाद कपड़ा बदल सकती हैं। लेकिन इस नदी में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। साथ ही साथ कीचड़ युक्त नदी में उतरने के रास्ते पर भी रोशनी नहीं होने से कई कांवरिया गिर रहे हैं। ऐसे में यहां रोशनी की व्यवस्था अति आवश्यक है। वहीं दूसरी ओर सुरक्षाबलों को भी कई जगह असुविधा का सामना करना पड़ रहा है चांदन कटोरिया पक्की सड़क सुग्गासार मोड़ पर जो टेंट लगाया गया है वहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। जिस कारण वहां रहने वाले महिला पुरुष आरक्षी बल को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। इतना ही नहीं प्रशासन द्वारा वहां प्लास्टिक का चार अस्थाई शौचालय का निर्माण तो कर दिया गया है। लेकिन पानी की कोई सुविधा नहीं होने के कारण उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। जिस कारण सुरक्षा बल को जंगलों का सहारा लेना पड़ता है। इस संबंध में पूछने पर स्थानीय पदाधिकारी व्यवस्था करने की बात कर चुप्पी साध लेते है। ऐसा ही नजारा भुलभुलैया पुलिस टेंट का भी है। जहां पंखा और फटा हुआ टेंट होने से पानी ऊपर से ही अंदर आता है।



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