दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : आशा कार्यकर्ताओं के हड़ताल से सीएचसी में चिकित्सीय व्यवस्था चरमरा गई है। हड़ताल के शुरूआती तीन दिनों तक तो सामान्य दिखा। अब पिछले तीन दिनों से कार्यकर्ताओं का हड़ताल उग्र हो गया है।मंगलवार को सभी कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे अस्पताल के मुख्य द्वार पर ही ताला जड़ दिया। अस्पताल में इलाज के लिए आनेवाले सभी मरीजों को लौटाने लगे। इस बीच गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले कई बुजुर्ग और असहाय लोग इलाज कराने पहुंचे। बुजुर्गों के लाख कहने के बावजूद भी कार्यकर्ताओं ने दरबाजा नहीं खोला। करसोप की एक महिला पातो देवी पेट दर्द से परेशान होकर पहुंचे , लेकिन दरबाजा नहीं खोलने से सड़क पर ही लेट गई। इसके बाद भी मुख्य दरबाजा नहीं खोला गया। सगुनी के 65 वर्षीय शिवानी देवी , बेलसीरा के 60 वर्षीय रेणु देवी , गिरधारा के 62 वर्षीय सीताराम मंडल सहित अन्य गांव के लोग आर्थिक तंगी के कारण इलाज कराने अस्पताल आए।आशा के सामने गरीबी का भी हवाला दिया , लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा।बताया कि घर से आटो पर किराया देकर इलाज कराने अस्पताल आए। अब कहां जाएं , उतना पैसा नहीं कि निजी क्लिनिक में इलाज करा सके । इतना कहते - कहते कई बुजुर्ग रोने लग गए। आशा के मनमानी रवैये पर अस्पताल प्रबंधन भी शांत रहे। करीब तीन घंटे इंतजार के बाद सभी बुजुर्ग पुरूष महिलाएं बैरंग वापस हो गए। यह स्थिति पिछले तीन दिनों से चल रहा है। प्रबंधक यशराज ने बताया कि आशा के हड़ताल से अस्पताल की विधि व्यवस्था चरमरा गई है। समझाने के बाद भी आशा नहीं मानते हैं। इसकी जानकारी जिला में दी गई है।


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