बांका: सावन में मकई गरीब किसानों के लिए एक ऐसा फसल है जिसे कांवरिया पथ पर बेच कर किसान काफी कमाई करते है। और सालों भर अपना परिवार पालते है। इसी लालच में प्रखंड के कई गांव में किसानों द्वारा मकई की खेती की गई है। लेकिन उन्हें तब काफी निराशा हो गयी जब बड़े बड़े मक्के की बाली में एक भी दाना नही लग सका। जिससे बड़ी पूंजी लगाकर खेती करने वाले किसान की कमर टूट गयी। इस प्रकार की बात सबसे अधिक प्रखंड के बिरनिया पंचायत के निलकोठी गांव में देखने को मिल रही है।जहां दर्जनों खेत पूरी तरह हरे भरे देख कर किसान काफी खुश थे।और उस मकई को सावन में बेचने की तैयारी कर बैठे थे। लेकिन मकई तोड़ते ही उनके आखों में आंसू आ गया। कमाई तो दूर उनकी लागत भी डूब गई।निलकोठी गांव के गरीब किसान द्वारा लगाये गये मकई में लालेश्वर मंडल 10 डिसमिल,बंगाली मंडल 20 डिसमिल,गणेश मंडल 15 डिसमिल,कमली देवी 10 डिसमिल,नुनलाल महतो छह डिसमिल सहित उसी गांव के अन्य किसानों ने अपनी अपनी जमीन पर मकई लगाया था।लालेश्वर मंडल बताते है कि हमलोगों ने काफी मंहगे दाम पर मकई का बीज खरीद कर लगाया था। इसके लिए कुछ किसानों ने बैंक और महाजन से कर्ज भी लेकर इस भीषण गर्मी में खाद के साथ कई बार सिचाई की भी व्यवस्था किया। जिससे मकई के पेड़ की लंबाई और मोटे मोटे बाली देख किसान अपनी सफलता पर काफी खुश थे।पर जब समय आया तो पता चला कि किसी भी बाली पर एक भी दाना मकई का नही है। जिसे देख किसानों ने सिर पीट लिया। अब इस मकई के पेड़ को जानवरों को खिलाने के अलावे कोई दूसरा काम नही हो सकता है। इससे सभी किसान पूरी तरह अपने आप को लूटा हुआ महसूस कर रहे है। सिर्फ निलकोठी के किसानों ने लागत के रूप में 50 हजार लगाया था। जबकि कुल नुकसानी चार लाख हुई है।
इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामयश मंडल ने कहा कि मकई में दाना नही लगने का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक तापमान 43 से 44 डिग्री होना है। जिसके कारण मकई में प्रयाग को बढ़ने का मौका नही मिला जिससे दाना नही आ सका।फिर भी अपनी टीम को भेज कर उसकी समुचित जांच किया जाएगा। अगर सरकार द्वारा किसी प्रकार के मुआवजे की बात होगी तो हमलोग प्रयास कर किसान को कुछ राहत दिला देंगे।
इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामयश मंडल ने कहा कि मकई में दाना नही लगने का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक तापमान 43 से 44 डिग्री होना है। जिसके कारण मकई में प्रयाग को बढ़ने का मौका नही मिला जिससे दाना नही आ सका।फिर भी अपनी टीम को भेज कर उसकी समुचित जांच किया जाएगा। अगर सरकार द्वारा किसी प्रकार के मुआवजे की बात होगी तो हमलोग प्रयास कर किसान को कुछ राहत दिला देंगे।



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