वर्षा के आभाव में धान बिचड़ा में पड़ने लगा दरार , किसान टैंकर की पानी से कर रहे बचाव

वर्षा के आभाव में धान बिचड़ा में पड़ने लगा दरार , किसान टैंकर की पानी से कर रहे बचाव

दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट


शंभुगंज (बांका) : प्रखंड क्षेत्र में मौसम की बेरूखी के कारण अब क्षेत्र के किसानों को पिछले साल की तरह सुखाड़ होने की चिंता सताने लगी है। वर्षा नहीं होने से खेतों में दरार पड़ने लगा है। धान का बिचड़ा मरने लगी है । किसान जैसे - तैसे बिचड़ा बचाने में लगे हैं। कई जगहों पर तो किसान टैंकर से खेतों में पानी देकर बिचड़ा बचा रहे हैं। मंगलवार को गुलनी - कुशाहा बहियार में कई किसानों को टैंकर से पानी देते हुए देखा गया। विपिन दास, विजय दास ,नीरज सिंह ,सदन सिंह सहित अन्य ने बताया कि क्षेत्रवासियों की जीविका खेती - किसानी पर आश्रित है , लेकिन यहां खेती वर्षाश्रित है।शुरूआत में मौसम अनुकूल होने के कारण काफी मेहनत और खर्च कर धान बीचड़ा तो गिरा दिया। अब धान रोपाई का समय आया तो मौसम दगा दे रही है। बताया कि गुलनी बहियार में सिंचाई का साधन बदुआ नदी का गुडबाल बांध है। अंधाधूंध बालू उठाव होने के कारण इस बांध का अस्तित्व मिट गया। बहियार में इक्के - दुक्के किसानों का बोरिंग है , लेकिन जलस्तर नीचे गिरने से वह भी फेल हो गया। जिस कारण किसी तरह टैंकर से बिचड़ा बचा रहे हैं । बताया कि पहले सड़क किनारे निजी व्यक्ति के समर्सेबल से खरीद कर टैंकर में पानी भरते हैं , फिर बिचड़ा सिंचाई करते हैं। बताया कि एक कट्टा भूमि सिंचित करने के लिए करीब तीन टैंकर पानी लगता है। पानी के आभाव में तो कई किसानों का बिचड़ा झुलसकर मर गया। इससे किसान हताश और निराश हैं। किसानों ने बताया कि सरकार का हर खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना कागजों में सिमटकर रह गई है। यदि सरकार बदुआ नदी से बालू उठाव बंद कर दे और गुडबाल बांध के पास बियर बना दे तो किसानों को सुखाड़ का दिन देखना नहीं पड़े। सरकार को इस दिशा में गंभीर होने की जरूरत है।

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