बोनसाई बनाने के सिखाये गये गुण

चम्पारणनीति/बेतिया(प.च.) *कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर में बोनसाई बनाने के सिखाए गए गुर*

 कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर में कौशल विकास योजना के अंतर्गत चल रहे माली गार्डन कीपर के प्रशिक्षण मे आज प्रशिक्षुओ को बोनसाई बनाने की तकनीक के बारे में बताया गया!
केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉक्टर अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया की बोनसाई बनाने की कला काफी पुरानी है और इसे सबसे पहले जापान से पहचान मिली! आजकल बोनसाई पेड़ प्राकृतिक सुंदरता के प्रतीक के रूप में उभर रहा है जिससे इसकी मांग काफी बढ़ रही! साथ ही साथ इन पौधों को तैयार करके रोजगार का साधन भी अपनाया जा रहा है ! यह पौधा निजी आनंद के लिए तथा बिक्री के लाभ से भी बनाया जा सकता है साथ ही साथ इसको कम समय मे डिजाइन किया जा सकता है और उच्च दाम पर बेचा जा सकता है! सबसे छोटा बोनसाई 15 सेंटीमीटर, छोटा बोनसाई 15 से 30 सेंटीमीटर, मध्य बोनसाई 30-60 सेंटीमीटर और बड़ा बोनसाई 60  सेंटीमीटर ऊंचा हो सकता है!
पौधा रोग विशेषज्ञ ने बताया बोनसई बड़े प्लांट का एक छोटा रूप है जो देखने में बेहद आकर्षक और मन को आकर्षित करने वाले होता है । उन्होंने इसके रख रखाव के बारे मे सुझाव भी दिए!

कृषि कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने निम्न जरूरी बातें बताई जिसे अपना करके एक अच्छा बोनसाई बनाया जा सकता है जो रोजगार से जिओकोपार्जन का जरिया बन सकता है!
* बोनसई पौधों को पात्रों में सही तरह से लगाना चाहिए.
* पेड़ों को लगाते समय जड़ों के बीच में हवा न रहे, लिहाजा पेड़ को अच्छी तरह से दबा देना चाहिए.
* बोनसाई को खुली हवा में रखें और इस बात का ध्यान रखें कि धूप चारों ओर से लगे.
* बोनसाई को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, लिहाजा उसे रोजाना पानी दें और तब तक दें, जब तक कि पानी पात्र से बहने न लगे.
* बोनसाई को वैसा ही आकार व प्रकार दें, जैसा कि वह कुदरती रूप से पाए जाते है.


* तांबे के तारों को कस कर न बांधें वरना पौधों पर तारों के निशान पड़ जाएंगे.

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