विकास नही तोअब वोट नही

विकास नही तोअब वोट नही

चम्पारणनीति/बेतिया(प.च.) लोकसभा आम निर्वाचन 2024 के चुनाव में जीत हाशिल किये जनप्रतिनिधियों से आम जनता को इस बार जगी बड़ी आशा व उम्मीद।
          जैसा कि ग्रमीण जानकारों का यह मानना है कि इस बार लोकसभा चुनावी प्रचार-प्रसार और जन सभाओ के दौरान प्राय: हरेक प्रत्याशी चाहे दलीय हो या निर्दलीय हो सबों ने जमकर  लोक लुभावन वायदे तथा घोषणाओं के माध्यम से जनमत पाने की कार्ड भुनाने में लगे रहे। और अन्त-अन्त तक सबों ने जी जान से दिन रात एक करके अपने समर्पित कार्यकर्ताओं व समर्थकों के साथ " वोट " बटोरने की जुगाड़ में लगे रहे।
          मतगणना के दरम्यान यह देखा गया कि कई उम्मीदवार तो अपना जमानत भी नही बचा पाये। तो कुछ ऐसे उम्मीदवार और उनके समर्थक लाखों-लाख मतों से जीत-हार की दंभ भर रहे थे। उनकी इस बार की चुनाव में मतदाताओं ने दाँत खट्टा कर दिया है। मतदाताओं ने इस बार तमाम दलीय व निर्दलीय उम्मीदवारों को सबक सीखाने से पीछे रहे। राज्य व जिले स्तर पर यह देखने-सुनने को मिलते रहा कि कई उम्मीदवारों को जनता की आक्रोश और विरोध को शर्मनाक तरीकों से झेलना पड़ा तथा कई मतदान केन्द्रों पर तो मतदान का विरोध भी हुआ। कूल मिला कर देखा जाय तो यह कहना कोई अतिशयोक्ति नही होगी कि अब मतदाता भी करीब-करीब जागरूक हो रहे है और अपने मत की महत्व को समझ कर हक-अधिकार की बात करने लगे है। जैसा कि यह प्रतित हो रहा है कि आने वाले चुनावों के दरम्यान उम्मीदवारों को अब सोच-समझ कर ही किसी पद के लिए उम्मीदवार बनना होगा और चुनाव जीतने के बाद अपने वायदों पर काम करना ही होगा। अन्यथा जनता जनार्दन तो अब कमर कस कर उतरने लगी है और सवालों से घेरने लगी है।
        यानी लोकसभा चुनाव 2024 ने सबक सीखने तथा जनप्रतिनिधियों को अब काम करने तथा मतदाताओं से किये गये वायदों पर खरा उतरने को मजबूर कर दिया है। अब आगे देखना होगा कि अगला पाँच साल का दौर कैसा होगा .... ?

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