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| किसानों लिए फायदेमंद: ड्रैगन फ्रूट की खेती |
चम्पारण नीति/बेतिया(प.च.) अब तो विदेशी फलों की मांग बढ़ने से किसानों का ध्यान ऐसी फसलों की खेती करने पर जोर दिया जा रहा है जिसका मुख्य उद्देश्य किसान भाइयों को खेती से अधिक लाभ प्राप्त करना है। कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट्स जिसे कमलम के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। क्योंकि इसकी व्यावसायिक खेती इजराइल श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम आदि देशों में बड़े पैमाने पर की जाती है परिणाम स्वरुप भारत में भी इसकी खेती का क्षेत्रफल धीरे-धीरे बढ़ रही है। डॉ सिंह ने बताया कि इसकी खेती सभी प्रकार की उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वहां पर जल निकासी की व्यवस्था हो। ड्रैगन फ्रूट में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जिस वजह से यह फल अधिक लाभदायक होता है जो बहुत सारी बीमारियों को रोकने और शरीर के अंदर प्रतिरोधक क्षमता का विकास करने में सहायक है। डायबिटीज के रोगियों के लिए या फल काफी फायदेमंद है जो ब्लड शुगर को बढ़ने से रोकता है हृदय की समस्याओं में एंटीऑक्सीडेंट होने से काफी लाभदायक है, कैंसर के रोग में कोलेस्ट्रॉल,पेट संबंधी विकारों,गठिया, इम्युनिटी बढ़ाने के लिए एवं डेंगू में लाभकारी होता हैं । इसके तीन किस्में हैं जैसे सफेद, लाल-गुलाबी एवं पीला जिसमें मुख्य रूप से लाल गुलाबी किस्म का प्रचलन अधिक है। इसके पौधे पर निकलने वाले फलों का ऊपरी और आंतरिक रंग गुलाबी होता है या फल खाने में अधिक स्वादिष्ट एवं बाजार भाव के दृष्टिकोण से प्रयुक्त होता है। इसे लगाने के लिए 45x45x45 सेंटीमीटर आकार का गड्ढा बनाकर 8 से 10 किलोग्राम गोबर की सड़ी हुई खाद एवं 150 ग्राम नीम की खली को मिट्टी में मिलाकर गड्ढे में भर दें इसके बाद गड्ढे की सिंचाई करने के उपरांत बीच में पोल लगाते हुए पोल के चारों तरफ अच्छे क्वालिटी के पौधों को लगाना चाहिए। पौध लगाने के लगभग 14 से 16 महीने में फलों की प्राप्ति होने लगती है। पूर्ण विकशीत पौधे से 1.5 से 2 किग्रा तक फलों की प्राप्त होती है। ड्रैगन फ्रूट्स के पौधे की रोपाई करके 20 से 25 सालों तक पैदावार के साथ अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।


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