गम्हरिया में गाय घेराई कार्यक्रम सम्पन्न

गम्हरिया में गाय घेराई कार्यक्रम सम्पन्न





चम्पारण नीति/बेतिया(प.च.
) आज गम्हरिया गाँव के महिलाओं द्वारा " गाय घेराई " का सप्ताहिक कार्यक्रम समाप्त हो गया।
            गौनाहा प्रखंड क्षेत्र बेलसंडी पंचायत के गम्हरिया गाँव की महिलाओं ने पिछले एक सप्ताह से बारीश के लिए परंपरागत विविध गतिविधियों के माध्यम से खेत-किसानी को आबाद करने के लिए "भगवान इन्द्र" से अनुनय-विनय कर रही है।
पाँच दिनों तक गाँव की तमाम महिलाएं उच्च-नीच, जाति-पाति, अमीर-गरीब की भेद भाव को भुलाकर प्रतिदिन रात्रि में थारू/आदिवासी लोक कला संस्कृति के विभिन्न आयामों जैसे- गीत,झूमर,सोहर,डांडिया व झमटा प्रस्तुत कर मनोरंजन के साथ-साथ बारीश के लिए प्रार्थना करती है।
         छठे वे दिन महिलाएँ  एक दूसरे के घरो से पानी माँगती है और एक दूसरे के शरीर पर पानी फेककर कपडा़ भीगोती है चाहे वह महिला हो या पुरूष। उस दिन गाँव के पुरुष अक्सर घरों में छीपकर रहा करते है। अन्यथा पुरूषों को पानी से नहलाने के साथ पैसों की वसूली भी करती है।
     इस परम्परागत आयोजन के सातवे दिन गाँव के सभी पशु किसी खास स्थान पर चरने के लिए भेजते है और गाँव की कुछ महिलाएं पुलिस वर्दी में भी गाँव भ्रमण के साथ उस चारागाह पर पहूँच कर " चर रही गाँयों को घेर लेती है तो गाँव के मदहस्त व जाने-माने व्यक्ति उन गाँयों को छुड़ाने के लिए जाते है तो ..... वे सभी महिलाएं मिलकर उक्त पुरुष को बंदी बना लेती है और पैसो की माँग करती है। बंदी पुरुष पैसे देकर गायों सहित खुद मुक्त होकर गाँव को वापस आते है....।
          स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विमलेश कांजी सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि थरुहट क्षेत्र में आज भी थारू व आदिवासी जाति अपनी सभ्यता, संस्कृति और कला को जीवित रखने के लिए हर संभव प्रयास करते है। इसी कड़ी में यह सप्ताहिक " गाय घेराई" कार्यक्रम थरुहट क्षेत्र के अधिकांश गाँवों में थारू संस्कृति को जीवन्त रखने तथा पिढी दर पिढ़ी अक्षुण्ण बनाने की एक जोरदार कोशिश है....।

Post a Comment

0 Comments