रजौन के लाल कुलपति ई. विवेकानंद सिंह ने छह माह के अंदर पूर्णिया विश्वविद्यालय में किए कई सराहनीय कार्य, क्षेत्र में हो रही चर्चा

रजौन के लाल कुलपति ई. विवेकानंद सिंह ने छह माह के अंदर पूर्णिया विश्वविद्यालय में किए कई सराहनीय कार्य, क्षेत्र में हो रही चर्चा

रजौन/बांका; प्रखंड के पड़घड़ी-लकड़ा पंचायत के पड़घड़ी ग्राम निवासी सह पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति इंजीनियर डॉ. प्रो. विवेकानंद सिंह ने अपने कार्यकाल के छह माह के समय अंतराल के अंदर ही विश्वविद्यालय में कई बड़े बदलाव कर न केवल पूर्णिया विश्वविद्यालय का नाम ऊंचा किया है, बल्कि उन्होंने अपने गृह प्रखंड रजौन सहित अपने पड़घड़ी-लकड़ा पंचायत एवं पैतृक गांव पड़घड़ी का भी नाम गौरवांवित कर दिया है, जिसकी क्षेत्र में काफी चर्चा हो रही है। बता दें कि इंजीनियर डॉ. प्रो. विवेकानंद सिंह ने विगत 22 जनवरी को पूर्णिया विश्वविद्यालय के तीसरे स्थाई कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला है। इससे पूर्व वे एनआईटी पटना में अध्यापक के साथ-साथ विभिन्न प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं। इनके प्रशासनिक अनुभवों को ध्यान में रखते हुए ही राजभवन द्वारा इन्हें पूर्णिया विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है। वहीं इन्होंने पूर्णिया विश्वविद्यालय में कदम रखते ही अपने इंजीनियर के गुणों को दिखाना शुरू कर दिया और इन्होंने विश्वविद्यालय के बन रहे नई संरचना के प्रारूप को बदलते हुए उसमें छात्र, शिक्षक, शैक्षणिक वातावरण के साथ-साथ खेल गतिविधि की संरचना को जोड़ा, जिससे इनकी काफी प्रशंसा हो रही है। इसके साथ ही अपने कार्यकाल के छह माह के अंदर ही विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और खामियों को दूर करते हुए इन्होंने शैक्षणिक व प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े फैसले लिए, जिससे इनकी काफी सराहना हो रही है। इंजीनियर डॉ. प्रो. विवेकानंद सिंह बताते हैं कि उनका सपना है कि पूर्णिया विश्वविद्यालय अंतर्गत सभी जिले में कम से कम एक आइकॉनिक कॉलेज का निर्माण हो, जहां न केवल शैक्षणिक वातावरण का निर्माण होगा बल्कि छात्र और शिक्षकों के आपसी सम्बंध भी मधुर होंगे। यहां छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार के भी अवसर प्रदान होंगे। बच्चों को खेलकूद के लिए सारी सामग्री उपलब्ध होंगी। वहीं क्लास के बाद छात्र-छात्राएं पुस्तकालय में बैठकर अपनी मनपसंद पुस्तकें पढ़ सकेंगे। कॉन्फ्रेंस रूम में शिक्षक अपना व्याख्यान दे सकेंगे। छात्र-छात्राएं ग्रुप डिस्कशन व डिबेट कर सकेंगे। छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं का समाधान शिक्षकों के पास जाकर कर सकेंगे और शिक्षक क्लास लेने के बाद थोड़ा विश्राम कर सकें। उन्होंने आगे बताया कि उनकी आगामी योजना अपने इस स्वप्न को पूरा करना है। इधर पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति ई. प्रो. विवेकानंद सिंह के ऐसे सराहनीय भरे कार्यों को देखकर इनके छोटे भाई जदयू प्रदेश सचिव सह पड़घड़ी-लकड़ा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मनोज सिंह समेत उनके अन्य सगे-सम्बंधियों के अलावे रजौन प्रखंड के शिक्षाविदों एवं बुद्धिजीवियों ने उन्हें बधाई देने के साथ-साथ उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की है।

रिपोर्ट :केआर राव

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