ईद मुबारक -2020

ईद मुबारक -2020


चाँद उतरता हो जिस आँगन, उसको ईद मनाने दे ।
अपनी किस्मत में बस रोजा, रोजा रोज निभाने दे ।
कब तक देख भरी माँगों को, अपना माथा फोडेंगे -
चाँद अड़ा है अपनी जिद पर, हमको भी अड़ जाने दे ।।


चाँद    देखकर  ईद   मुबारक-
तुम भी बोलो  मैं  भी    बोलूँ।

वर्षों  तक  उपवास   रखा  था,
मधुर मिलन की आस रखा था,
अन्तहीन     निष्ठुर   पतझर में-
कैसे     कहो    विरह में  डोलूँ?
चाँद देखकर......................।

कुछ  के  हिस्से  पावस आया,
मधु  बसन्त  कुछ को हरषाया,
ऐसा    सिर    मुड़वाया    मैनें-
ओले    में   कैसे   पट   खोलूँ?
चाँद देखकर....................।

चाँद  सभी  के छत पर उतरा,
मेरे    घर    अँधियारा   पसरा,
तुम  बिनु   मेरी  ईद    अधूरी-
छुपकर  तनहाई   में   रो  लूँ ?
चाँद देखकर....................।

डॉ अवधेश कुमार 'अवध'

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