बेतिया । नगर परिषद हर साल करोड़ो करोड़ रुपये का राजस्व वसूल कर उसे नगर के विकास में खर्च करता है, परंतु इसे नगर पालिका के अधिकारियों की सोच कहे या बदइंतजामी कहे या गलत सोच का नतीजा बारिश के शुरू होते ही नगर के चारो ओर जलजमाव नजर आने लगता है और नगर परिषद पानी रुकते ही नालो का जाम खोलने में व्यस्त हो जाता है परन्तु कभी भी नगर परिषद इस पर ध्यान नही देता की बरसात में जो हजारो क्यूसेक पानी नगर में बरसेगा उसका निकास कहाँ होगा अगर आम जनता की माने तो नगर के नालो का रूख पथरी घाट की और चंद्रावत की तरफ मोड़ दिया जाय तो नगर के पानी की निकासी नदी में होने से नगर में जल जमाव की स्थिति से निजात मिल सकती है नगर परिषद की सोच का अंदाजा जब आप सोवा बाबू चौक पर जाए तो नज़र आता है जहां नगर के सुन्दरीकरण पर काफी ध्यान दिया गया वही पर नगर का नामी चौराहा सोवा बाबू चौक की बनावट नगर परिषद में हो रहे सुन्दरीकरण में अजीब सा महसूस करता है आखिर इस चौराहे को ऐसा कैसे बन गया कि थोड़ी ही बारिश में यह जल जमाव का केंद्र बन गया सबसे बड़ी बात की नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी कुछ भी बताना तो दूर कुछ भी कहने से परहेज करते आ रहे है।वो तो मिलने का समय देने तो दूर बातों का जबाब देना भी उचित नही समझते के बार उनको वाट्सअप किया लेकिन उन्होंने कोई जबाब देना उचित नही समझा। आखिर ऐसा समझ मे नही आता कि नगर परिषद क्या सोचता है और क्या करता पानी रूकते ही लाव लश्कर के साथ सफाई में लग जाना ही काम है या सही प्लानिंग कर ये तो कार्यपालक अधिकारी ही जाने लेकिन वो तो मौन धारण किये है इसीलिए जल जमाव पर उनका कोई विचार जनता तक पहुंचाने में चम्पारण नीति असमर्थ है ।

