मेरा जीवन और पापा

 दुनिया से अनजान मैं एक 

किलकारी के साथ आई 

पापा ने प्यार से जीवन भर

हर खुशी लुटाई ..


उठे जब नन्हे कदम मेरे 

ठोकर लगी मुझे मुझसे ही,

जख्मों पर महरम लगाया उन्होंने।


लड़की हैं क्या करेगी पढ़कर 

फिर भी मुझे, कलम हाथ थमाई।


सबके आँखों में ना खटकु 

मेहंदी भी लगवाई ...

हर खुशी की दुआ देकर मेरी डोली

कांधे पर उठाई ...

बेटी बोझ की भी एक बोझ उतारी ...


- गुलशन पाण्डेय

(हिंदी लेखिका)

मधेपुरा , बिहार

Post a Comment

आप सभी हमें अपना कॉमेंट / संदेश भेज सकते हैं...

Previous Post Next Post