प्रिय आओ नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन है। कैसा हो आगामी कल हृदय में स्पंदन है । विगत वर्ष तो स्वास्थ्य, प्रगति से है कमजोर रहा। क्या-क्या दुख पीड़ा …
मंगलमय नव वर्ष आपका,खुशियाँ लाये हजार। यहीं शुभकामना हमारी,सुखी रहे परिवार।। अभिनन्दन हो आया नुतन,वर्ष बीस सौ एक। पूर्ण करेंगे सिन्धु सूता पति,अभि…
नए साल की नई उमंगें नई तरंगें लेकर आओ फिर से जी लें अब हम जीवन में रस लेकर बीता है यह साल बहुत ही कष्टों में हम सबका गंवा दिया जीवन कितनों ने मानव म…
अगर गर्मियों के शाम को यादों में बंधना हो तो कहानी बेहतर होगी क्या ? नहीं मुझे लगता है कि सबसे सटीक रहेगी कविताएं , कच्ची सी कविताएं , जो अक्सर गहरे …
" जिगर चाहिए " जिंदगी देनेवाला खुदा, कर्म-आमाल इंसान के हाथ, अच्छे-बुरे में फर्क समझने, इंसानी जिगर चाहिए! सारी सुविधाएं, हो जात-…
(बाबू वीर कुँवर सिंह का फाईल फोटो) पावन त्याग और अतुलित बलिदान की यशोभूमि का नाम है भारत वर्ष। शिशु अजय सिंह के बलिदा…
(लेखक - डॉ अवधेश कुमार अवध ) हिंदी ने सब कुछ सिखलाया, हिंदी का गुणगान करें। जिसने जना चंद जगनिक कवि, उसका हम सम्मान करें।…
(लेखक -जयराम शुक्ला मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार है ) दिलचस्प संयोग है कि हिन्दी दिवस हर साल पितरपक्ष में आता है। हम लगे हाथ हिन्दी के पुरखों…
( लेखक -डा. शाहिद अली , फाईल फोटो) 13/09/2020 , हिंदी दिवस पर विशेष । उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध का समय जब भारत में स्वदेश प्रेम की …
कोरोना से छिड़ी भयंकर,जंग जीत ही जायेंगे । अभी ज़रा विचलित हैं लेकिन,कब तक यूँ घबरायेंगे ।। मानवता के शुक्ष्म शत्रु का,छद्म रूप दिखलाना है । है सवार …
कोरोना वायरस अपने स्वरूप को तेजी से परिवर्तित कर रहा है। इस परिवर्तन के दौरान यह कभी पहले से ज्यादा शक्तिशाली हो जाता है और कभी कमजोर। विज्ञान की भ…
मिल बाबुल से बिटिया रोये ,छोड़ चली घर द्वारा । सपनों से भी जो सुंदर था ,प्राणों से भी प्यारा । जब मैं छोटी सी बच्ची थी ,जल्दी तुम घर आते थे । गुड़िया…
शुक्रिया तेरा ऐ कोरोना, आंखें सब की खोल दिया, जीने के लिए क्या है जरूरी, तूने सबको बता दिया! डॉक्टर मना करते थे, तेल मसाले से परहेज करो, बिखेरा ऐसा ज…
आखों में प्रेम, ह्रदय में गंगा आँचल में छुपी ममता की मूरत होती है। हाँ, माँ बस माँ होती है ..। अपनी खुशी न्योंछावर कर वो बच्चों के होटो पर मुस्का…
कई संघर्षो से भरी है एक औरत की कहानी हर मोड़ पर ठोकर मिलती बचपन हो या हो जवानी समाज से लेकर घर तक, भेद - भाव पर निकलता है उसके आँखों से पानी ब…
जवानों का जोश हाई है चीन की शामत आई है गलवान घाटी हमारी है आगे की पूरी तैयारी है गलवान को हाथ लगाओगे तो मिट्टी में दफ़न कर दिये जाओगे हम…
गहन अंधेरी रात में, लोकतंत्र है लैम्प बुझा रहे उसको मगर, जाति धर्म के कैम्प लोकतंत्र में लोक की, यही रही औकात उनके हिस्से रोशनी ,अपने हिस्स…
शहीदों की क़ुरबानी से, हुआ देश आजाद हमारा है लहराता है जब तिरंगा ,लगता कितना प्यारा है * कश्मीर से कन्याकुमारी तक,भारत को सबने संवारा है मिली आज…
टूटते, घुटते जा रहे रिश्ते प्रेम, स्नेह, भाईचारा, अपनत्व, दरकते , सिसकते जा रहे अब गांठ में उलझते जा रहे रिश्ते। संयुक्त परिवार की परिभाषा अब खत्म …
निपट गंवार था धीरु..बड़े बाप की बिगड़ैल औलाद हुकूमत के सिवा सीखा ही नही कुछ..औरत को पांव की जूती समझता । सब गांव वालों की आँख में चुभता पर मुखिया के…
(संपादक -आदित्य कुमार दुबे)
"चम्पारण नीति " की नीति
सादगी, जबरदस्त जोश और चेहरे पर एक दृढ़ संकल्प लिए। बिना किसी लोभ व लालच अथवा किसी द्वेष के कारण नहीं, बल्कि असहाय , पीड़ितो और अत्याचारों से भरी फरियादों की, जो अनसुनी कर दी जाती है। "चम्पारण नीति " ढ़ाल बन कर उन शोषितों की पीड़ा को सबके समक्ष रखने का कार्य करेगा। निर्भीकता के साथ सरकार और उसके अधिकारियों की आलोचना,जनता की कठिनाईयों की चर्चा करने से कभी पीछे नहीं हटेगा। किसी की प्रशंसा या अप्रशंसा , किसी की प्रसन्नता या अप्रसन्नता, किसी की घुड़की या धमकी , हमें अपने सुमार्ग से विचलित न कर सकेगी । साम्प्रदायिक और व्यक्तिगत झगड़ों से "चम्पारण नीति" सदा अलग रहने की कोशिश करेगा । इसका जन्म किसी विशेष सभा, संस्था, ख्याति या मत के पालन- पोषण, रक्षण या विरोध के लिए नहीं हुआ है, किंतु इसका मत स्वतंत्र विचार और इसका धर्म सत्य होगा । मनुष्य की उन्नति भी सत्य की जोत के साथ होती है । इसीलिए सत्य को दबाना हम महापाप समझेंगे और इसके प्रचार और प्रकाश को महापुण्य!
-: आदित्य कुमार दुबे
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