" जिगर चाहिए "
जिंदगी देनेवाला खुदा, कर्म-आमाल इंसान के हाथ,
अच्छे-बुरे में फर्क समझने, इंसानी जिगर चाहिए!
सारी सुविधाएं, हो जात-पात अमिरी-गरीबी से परे,
दम तोड़ते हुए मरीज को, सहारा वक़्त पर चाहिए !
वक़्त पर रोटी मिले ना मिले, महामारी के मौसम में,
गरीबों की जान बचाने, दवाईयां वक़्त पर चाहिए!
तकलीफ सहने की बात, हम से ना करो " शेख "
उसके लिए तो सिर्फ "मजदूर" का जिगर चाहिए!
तोला जाएगा सभी कर्मों को, इंसाफी तराजू में,
कर्मों का फल चखने , सब्र वाला जिगर चाहिए!
ज़ुल्म करनेवालों से, ज़ुल्म सहनेवाला "गुनाहगार",
ज़ुल्म के खिलाफ लड़ने, पत्थर का जिगर चाहिए!
- मुख्तार शेख "मनमाडी " मुख्तार शेख "मनमाडी"


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