आखों में प्रेम, ह्रदय में गंगा
आँचल में छुपी ममता की मूरत होती है।
हाँ, माँ बस माँ होती है ..।
अपनी खुशी न्योंछावर कर
वो बच्चों के होटो पर मुस्कान बिखेरती है।
हाँ, माँ बस माँ होती है ..।
हर त्याग की अखण्ड मूरत
और रातों की सलोनी होती है।
हाँ, माँ बस माँ होती है ..।
कहीं लगे जो ठोकर वो दौड़ के पास आती है
अंगुली पकड़ कर वो हमें चलना भी सिखाती है।
हाँ, माँ बस माँ होती है ..।
- गुलशन पाण्डेय
मधेपुरा , बिहार