नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन है

नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन है


 प्रिय आओ नव वर्ष
 तुम्हारा अभिनंदन है।
कैसा हो आगामी कल 
 हृदय में स्पंदन है ।

विगत वर्ष तो स्वास्थ्य, प्रगति से
 है कमजोर रहा।
क्या-क्या दुख पीड़ा झेली है
क्या-क्या नहीं सहा ।
भूख,गरीबी,लाचारी का
तांडव क्रंदन है ।
प्रिय आओ नव वर्ष
तुम्हारा अभिनंदन है।।

खुशियों के उपहार अनूठे
सँग में अपने लाना ।
स्वास्थ्य और शिक्षा विकास की
धारा सतत बहाना ।
हों अभाव सब दूर जगत से
विनत भाव से बंदन है ।
प्रिय आओ नव वर्ष
तुम्हारा अभिनंदन है ।।

खूब अँधेरे में हम भटके
घर में बंद रहे ।
नव प्रकाश को तरस गये हम
किससे कौन कहे ।
है स्वागत सत्कार तुम्हारा
आतुर रोली चंदन है ।
प्रिय आओ नव वर्ष
तुम्हारा अभिनंदन है ।
  

                                  श्याम सुन्दर श्रीवास्तव 'कोमल' 

 व्याख्याता-हिन्दीअशोक उ०मा०विद्यालय,लहार 
 जिला-भिण्ड(म०प्र०)

Post a Comment

0 Comments