CAS विषय पर आधारित कार्यशाला में बोले कुलपति, फेक कन्टेंट को बेनकाब करें ।

CAS विषय पर आधारित कार्यशाला में बोले कुलपति, फेक कन्टेंट को बेनकाब करें ।


स्वास्थ्य पत्रकारिता जिम्मेदारी की पत्रकारिता - प्रमोद जोशी

समाज में सकारात्मक माहौल का निर्माण करें - संजय देव

पाठकों तक विश्वसनीय एवं सही सूचनाएं पहुंचाएं – संजय अभिज्ञान

29 जनवरी को पत्रकारों के लिए होगी कार्यशाला

पत्रकारिता विश्वविद्यालय-यूनिसेफ का संयुक्त आयोजन  

एमसीयू में विद्यार्थियों के लिए जन-स्वास्थ्य और तथ्यपरक पत्रकारिता(CAS) विषय पर कार्यशाला

भोपाल । स्वास्थ्य पत्रकारिता न केवल सामाजिक दृष्टिकोण से आवश्यक है बल्कि पत्रकारिता के विद्यार्थी होने के नाते ये आपके कैरियर के लिए भी बहुत जरुरी है। इसीलिए आपका फर्ज बनता है कि आप फेक कन्टेंट को बेनकाब करें । माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय एवं यूनिसेफ के द्वारा आयोजित जन-स्वास्थ्य और तथ्यपरक पत्रकारिता (CAS) पर आधारित विद्यार्थियों की कार्यशाला में ये विचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.जी. सुरेश ने व्यक्त किए । विश्वविद्यालय के जनसंचार, प्रबंधन एवं कम्प्यूटर एवं अनुप्रयोग विभाग के साथ ही नोएडा, खंडवा एवं रीवा परिसर के विद्यार्थियों के लिए आयोजित कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रुप में वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी,  संजय देव, एवं  संजय अभिज्ञान ने स्वास्थ्य पत्रकारिता पर अपने विचार व्यक्त किए । 

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि आजकल कोरोना को लेकर बहुत फेक कन्टेंट आ रहा है, जिससे सनसनी फैल रही है इसीलिए ऐसे मामलों में सरकारी वर्जन बहुत जरूरी है । बिना तथ्यों को जांचे-परखे कभी भी खबरों को नहीं प्रकाशित करना चाहिए । उन्होंने कहा कि सरकारी वर्जन के साथ ही खबरों को प्रकाशित करना चाहिए । प्रो. सुरेश ने कहा कि नकारात्मक खबरें छापने का दूरगामी परिणाम होता है, इसीलिए हमें सकारात्मक खबरें छापना चाहिए । प्रो. सुरेश ने कहा कि कोरोनाकाल में अफवाहें, अटकलें फैलाईं जा रही हैं, जो दिन-दूनी रात-चौगुनी गति से बढ़ती जा रही हैं, पत्रकारिता के विद्यार्थी होने के नाते आपको साक्ष्य आधारित पत्रकारिता करते हुए अपनी जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए । वर्तमान परिपेक्ष्य में प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता की सराहना करते हुए प्रो. सुरेश ने मीडिया की गेटकीपिंग थ्योरी को भी समझाया । उन्होंने कहा कि आजकल सूचना के लिए लोगों की भूख बढ़ गई है, अत: हमारा कर्तव्य बनता है कि हम पाठकों तक विश्वसनीय खबरों को पहुंचाएं । प्रो.सुरेश ने कहा कि पत्रकारिता का मूल कार्य सिर्फ सूचित करना, शिक्षित करना ही नहीं है, बल्कि लोगों को प्रेरित करना भी है । हेल्थ रिपोर्टिंग की महत्ता बताते हुए कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता को जिले स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है । उन्होंने 29 जनवरी को पत्रकारों के लिए भी स्वास्थ्य पत्रकारिता पर कार्यशाला का आयोजन किए जाने की बात कही । 

वरिष्ठ पत्रकार श्री संजय देव ने कहा कि कोरोनाकाल में खबरों की बाढ़ सी आ गई है लेकिन हमें तथ्यों की जांच-पड़ताल करके ही सहीं सूचनाओं को लोगों तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आशंकाएं एवं समाधान हर जगह से अलग-अलग आ रही हैं, हमें गंभीरता से इन्हें समझते हुए पत्रकारिता करनी चाहिए । हमारा फर्ज बनता है कि हम अफवाहों, अटकलों एवं भ्रमों का निवारण करें और समाज में एक सकारात्मक माहौल का निर्माण करें। स्वास्थ्य पत्रकारिता में डर का वातावरण न बनाने की बात कहते हुए श्री देव ने कहा कि हमें तथ्यों के दायरें में रहते हुए समाज में उपयोगी जानकारियों को पहुंचाना चाहिए। 

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि आप स्वास्थ्य पत्रकारिता करना चाहते हैं इसमें विशेषज्ञता का होना बहुत आवश्यक है । आपको इससे संबंधित कुछ जरुरी जानकारियों का पता होना चाहिए । उन्होंने कहा कि जांच-परख,तथ्य,कौशल एक स्वास्थ्य पत्रकार के पास होना जरुरी है । स्वास्थ्य पत्रकारिता बिना सिद्धांतों के नहीं करने की बात करते हुए श्री जोशी ने कहा इसमें वस्तुनिष्ठता,स्पष्टवादिता एवं परिशुद्धता का होना बहुत आवश्यक है । स्वास्थ्य पत्रकारिता को जिम्मेदारी की पत्रकारिता बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे समाज से हमदर्दी रखें उनसे दूरी न बनाएं । 

वरिष्ठ पत्रकार श्री संजय अभिज्ञान ने कहा कि हेल्थ रिपोर्टिंग में खतरा बहुत है, क्योंकि फेक न्यूज से किसी के जीवन को बचाने की जगह उसे मौत के मुंह में भी पहुंचाया जा सकता है। अत:पत्रकारिता के विद्यार्थियों को इससे बचते हुए तथ्यपरक पत्रकारिता करनी चाहिए ,पाठकों तक विश्वसनीय एवं सहीं सूचनाओं को पहुंचाना चाहिए । स्वास्थ्य पत्रकारिता का काम लाखों करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है । उन्होंने विभिन्न बीमारी की परिभाषाओं को समझाते हुए कहा कि आजकल मानसिक बीमारी को बीमारी नहीं माना जाता है, जबकि यह भी एक बीमारी है । उन्होंने कहा कि आजकल ब्लड प्रेशर,डायबिटीज,कैंसर जैसी बीमारियों को ही पाठकों तक पहुंचा जा रहा है, जबकि समाज में कुपोषण भी हैं । श्री अभिज्ञान ने विद्यार्थियों से समाज हित में कलम उठाकर स्वास्थ्य पत्रकारिता करने की बात कही । 

कार्यशाला का समन्वय एवं संचालन सहायक प्राध्यापक श्री लाल बहादुर ओझा ने किया । कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) अविनाश वाजपेयी, युनिवर्सिटी कैंपस मेंटर डॉ. मणिकंठन नायर, प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर अंकित पांडे, विश्वविद्यालय के जनसंचार, प्रबंधन एवं कम्प्यूटर एवं अनुप्रयोग विभाग के साथ ही नोएडा, खंडवा एवं रीवा परिसर के विद्यार्थी भी ऑनलाइन उपस्थित थे।

 (mcu  द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार) 

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