दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभूगंज (बांका): प्रखंड मुख्यालय में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना (मनरेगा) में काम किए बगैर राशि निकासी मामले का पर्दाफाश होते ही प्रखंड से लेकर जिला प्रशासन में हलचल मच गया। कार्रवाई की भय से मनरेगा कर्मियों ने काम शुरू कर दिया है। सोमवार से ही मनरेगा पदाधिकारी के निर्देश पर एक संवेदक ने प्रखंड बीआरसी से कस्तूरबा विद्यालय तक मिट्टी भराई करने के साथ ईंट सोलिंग का काम शुरू कर दिया। एक सप्ताह पूर्व चंपारण नीति ने ' मनरेगा योजना कार्य : धरातल पर काम नहीं और हो गई राशि की निकासी ' नामक शीर्षक की खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस फर्जीवाड़े की योजना में कार्य एजेंसी पर कार्रवाई न हो जाए, इस भय से सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया। कोरोनाकाल के दौरान प्रवासी कामगारों को काम मिले मनरेगा योजना द्वारा वित्तीय वर्ष 2020 - 21 में मनरेगा योजना के तहत योजना संख्या 0545003/RC/20412104 बीआरसी होते हुए आईटी भवन के पीछे पुल तक पीसीसी सड़क की 9 लाख 99 हजार की राशि स्वीकृत किया गया योजना में काम कुछ नहीं हुआ और 8 लाख 4 हजार 588 रूपया की निकासी हो गई आश्चर्य तो यह है कि बगैर काम के 756 मनरेगा श्रमिकों को दिखा राशि निकासी कर ली मामले का खुलासा तब हुआ जब कस्तूरबा की वार्डन सड़क समस्या लेकर प्रखंड प्रमुख के पास पहुंचे जब प्रमुख सुमन कुमार सुमन ने प्राकलन तैयार करने विभाग को कहा तो गड़बड़झाला का मामला सामने आया इस संबंध में मनरेगा पीओ मनोहरलाल से पूछने पर बताया कि कस्तूरबा विद्यालय तक सड़क निर्माण योजना जो पूर्व में पारित हुआ अब उस कार्य को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जा रहा है।

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