-:बिहार दिवस पर विशेष:-हम हैं बिहार | बिहार दिवस उत्सव 2022 ।
अमित कुमार। आज बिहार दिवस है। आज बिहार का गौरव गाथा गया जाएगा,विकास की चर्चाएं होंगी और होनी भी चाहिए,हम सभी जिस तरह अपने घर के सदस्य बच्चों बड़े बुजुर्गों का जन्मदिन मनाते हैं ठीक उसी प्रकार 22 मार्च को हर प्रदेशवासी बिहार और अपनी मिट्टी की पहचान का भव्य जन्मोत्सव उल्लास अपने अपने तरीकों से जरूर मनाना चाहिए।बिहार के 110 वे स्थापना दिवस पर आप सभी को बहुत बहुत अभिनंदन।आगामी 22 मार्च से 24 मार्च तक होने वाले बिहार दिवस की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।वर्ष 2022 में पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में बिहार के कलाकार अपना हुनर बिहार दिवस के उपलक्ष्य में बिहार में दिखा पायेगें जो बिहार वासियों के लिए सुखद पल होगा।22 मार्च से तीन दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम का उद्घाटन सीएम नीतीश कुमार करेंगे.आपको बताते चले कि वर्ष 2010 में पहली बार पटना के गांधी मैदान में भव्य बिहार दिवस मनाकर कार्यक्रम की शुरुआत की गई. वर्ष 2012 में 100 साल पूरे होने पर बिहार दिवस खास तरीके से आयोजित किया गया था.बिहार का अतीत गौरवशाली
रहा है।लेकिन अतीत की बैशाखियों के सहारे ही सिर्फ भविष्य की चढ़ाई नहीं चढ़ी जा सकती हैं।देश और दुनिया में बिहार की प्रतिष्ठा काफी रही है.केवल शिक्षा के क्षेत्र में नहीं, बल्कि राजनीति, कूटनीति,सामरिक शक्ति,संस्कृति, धार्मिक,अध्यात्मिक,पर्यटन,तीर्थाटन, कृषि लिए भी विख्यात रहा है.बिहार के शैक्षणिक व् सांस्कृतिक वैभव का उल्लेख जितना किया जाए वो कम होगा। प्राचीन समय में बिहार ज्ञान के क्षेत्र में,कृषि के क्षेत्र में,और पर्यटन के क्षेत्र में आज से अधिक विकसित रहा है।प्राचीन काल में यहां ऐसे विश्वविद्यालय हुआ करते थे जिसमें देश दुनिया के लोग अपने ज्ञान की प्यास बुझाने आया करते थे।आज बिहार के युवा पीढ़ी को स्वर्णिम अतीत का गौरव बोध सामाजिक स्तर पर करना और करवाना चाहिए।वो साल 1912 का था,जब 22 मार्च को बिहार को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर राज्य बनाया गया था।बिहार का आधुनिक इतिहास में 1857 के प्रथम सिपाही विद्रोह में बिहार के बाबू कुंवर सिंह का नाम जरूर आता है, उन्होंने इस विषय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.साल 1912 में बंगाल का विभाजन के बाद बिहार नाम का राज्य स्थापित हुआ था,जिसके बाद ये राज्य अस्तित्व में आया।बिहार बौद्ध संस्कृति का जन्म स्थान है,जिस वजह से इस राज्य का नाम पहले विहार और उससे बिहार बना.1935 ई में बिहार से अलग होकर ओड़िशा और 2000 ई में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बना।बिहार को पहले मगध नाम से जाना जाता था.बिहार की राजधानी पटना का नाम पहले पाटलिपुत्र था.बिहार के वैशाली जिले को दुनिया का पहला गणतंत्र माना जाता है.इसी जगह पर भगवान महावीर का जन्म हुआ था.भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद बिहार से ही थे.हिंदु पुराणों के अनुसार माता सीता का जन्म भी बिहार में हुआ. इसी राज्य में भगवान राम और माता सीता का मिलन भी हुआ.बिहार से ही बुद्ध और जैन धर्म की उत्पत्ति हुई. इसी राज्य में भगवान बुद्ध और महावीर का जन्म हुआ.बिहार में ही दुनिया के सबसे पुराना विश्वविद्यालय (नालंदा यूनिवर्सिटी) है.12वीं शताब्दी के बाद इस खूबसूरत स्थान के साथ तोड़-फोड़ कर नुकसान पहुंचाया गया.इस स्थान के खंडहर हो जाने के बावजूद साल 2016 में इस स्थान को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO World Heritage) में शामिल किया गया.बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया का सबसे प्राचीन और समृद्ध शिक्षा का केंद्र था।नालंदा पुस्तकालय 'रत्नरंजक', 'रत्नोदधि' एवं 'रत्नसागर' नामक तीन विशाल भवनों में स्थित था। इस विराट पुस्तकालय में सभी विषयों से सम्बंधित अनेक पांडुलिपियाँ थीं जो अब नष्ट हो चुकी हैं।बिहार में ही एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला (सोनपुर मेला) लगता है. बिहार के सोनपुर इलाके में यह मेला हर साल नवंबर-दिसंबर (कार्तिक पूर्णिमा) में लगता है.विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ आर्यभट भी बिहार से थे,जानेमाने लेखक वात्स्यायन भी बिहार से थे.सिखों के 10वें गुरु (गुरु गोबिंद सिंह) का जन्म भी बिहार में हुआ. हरमिंदर तख्त (पटना साहिब) पटना में है.भारत के प्रसिद्ध सम्राट चद्रगुप्त मौर्य, विक्रमादित्य और अशोका भी बिहार से ही हैं.बिहार के गौरव को पुनः प्रतिस्थापित करने के लिए युवा पीढ़ी,प्रवासी एवं बुद्धिजीवियों को व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करना होगा ।

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