सीता राम विवाह संयोग नही एक नियति थी।-अनिल व्यास

सीता राम विवाह संयोग नही एक नियति थी।-अनिल व्यास

बांका:चांदन दुर्गा मंदिर के प्रांगण में चल रहे दस दिवसीय शत चंडी महायज्ञ को लेकर इलाके का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।यज्ञ और हवन में भाग लेकर श्रद्धालु जहां अपने आपको धन्य महसूस कर रहे हैं।वहीं प्रतिदिन अनिल बाल व्यास के भागवत कथा प्रवचन के दौरान श्रोता के बीच धर्म और पुण्य की अविरल रसधारा का प्रवाह हो रहा है जिसका भक्तगण रसपान कर रहे है।कथा प्रवचन के चौथे दिन सीता स्वयंवर और शिव धनुष के संबंध मे चर्चा करते हुए अनिल व्यास ने कहा  कि दोनों भगवान  का जन्म भले ही मनुष्य के रूप मे हुआ था लेकिन व्यक्तित्व असाधारण था।स्वयंवर से सीता और राम का विवाह महज संयोग और विधि का विधान नहीं था बल्कि यह एक नियति थी जिसने राम और सीता को मिलाया था। रामायण बताती है कि राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर की घोषणा के साथ यह ऐलान कर दिया था कि जो धनुष की प्रत्यंचा को चढ़ा देगा उसी के साथ मेरी पुत्री सीता का विवाह होगा। इस स्वयंवर में भोलेनाथ का परम् भक्त रावण भी आया था और उसे इस बात का भरोसा था की शिव भक्त होने के कारण धनुष तो वह तोड़ेगा ही साथ में सीता भी उसी की होगी।कहा जाता है कि शिव धनुष कोई साधारण धनुष नहीं था बल्कि उस काल ब्रह्मास्त्र छोड़ने का एक यंत्र था जिस पर रावण की निगाहें टिकी हुईं थी। गलत हाथ में जाने और इसका गलत इस्तेमाल होने से भयंकर विनाश हो सकता था। देव ऋषियों ने सर्वसमाज के सामने इसे नष्ट करने के उपाय के आयोजन और नष्ट करने के लिए सही व्यक्ति के चुनाव का जिम्मा महर्षि विश्वामित्र को दिया गया और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए स्वयंवर का आयोजन किया गया था।भगवान राम और माता सीता का विवाह हमें विवाह की मर्यादा और पति पत्नी के धर्म का बोध कराती है। सीता -राम स्वयंवर विकट परिस्थिति में एक दूसरे का साथ देने और मनुष्य जाति को पति पत्नी का धर्म सिखाता है।


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