बांका:यज्ञ भारत का प्राण है,जिस दिन से यज्ञ होना बंद हो जाएगा,भारत का विध्वंस हो जाएगा-कथावाच अनिल व्यास उक्त बाते चांदन दुर्गामंदिर परिसर में दस दिवसीय शतचंडी महायज्ञ के दौरान प्रवचन करते हुए अनिल व्यास द्वारा कहा गया। खचाखच भरे पंडाल में उपस्थित महिला पुरुष भक्तो को उन्होंने बताता की हिन्दू धर्म में यज्ञ की परम्परा वैदिक काल से चली आ रही है। धर्मग्रंथो में मनोकामना पूर्ति एवं अनिष्ट को टालने के लिए देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ किए जाने की परम्परा रही है । यज्ञ एक विशिष्ठ वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने जीवन काल को सफल बना सकता है । अनिल बाल व्यास ने अपने कथा प्रवचन के दौरान यज्ञ के आयोजन और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्राण तथा वैदिक धर्म का सार है ।यज्ञ केवल भौतिक कर्मकांड नहीं बल्कि यह अध्यात्मिक अनुष्ठान है । यह संसार का सबसे श्रेष्ठतम कर्म है जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मनुष्य को शुद्ध करती है, और उनके जीवन को सफल बनाता है । यज्ञ से परम् ब्रह्म की प्राप्ति होती है और मनुष्य को सारे बुरे कर्मों से दूर रहते हुए धर्म और पुण्य के पथ पर चलकर सफल जीवन जीने की प्रेरणा देता है। जो मानव यज्ञ पंडाल में उपस्थित हो जाता है।वह कभी चंडाल नही बनता बल्कि पढाई लिखाई के साथ वह एक संस्कारशील मानव बनता है।


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