पदाधिकारियों के निरीक्षण करने के बावजूद भी विद्यालय में बच्चे को उपस्थिति नहीं बढ़ पा रही है

पदाधिकारियों के निरीक्षण करने के बावजूद भी विद्यालय में बच्चे को उपस्थिति नहीं बढ़ पा रही है

पंकज कुमार सिंह की रिपोर्ट

संग्रामपुर(मुंगेर): जहां एक और बिहार सरकार के द्वारा शिक्षा सुधार को लेकर के हर वर्ष लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रही है बिहार के बच्चे पढ़ें और आगे बढ़े जिसको लेकर के सरकार ने हर विद्यालय में शिक्षक विद्यालय का भवन बिजली वाईफाई  जैसे  सुविधा मुहैया कराई है लेकिन कुछ पदाधिकारियों के भ्रष्टाचारी चरम सीमा पर होने के कारण बच्चे अपना जीवन मौत में धकेल करके पढ़ाई कर रहे हैं ताजा मामला प्रखंड के चंद्रपुरा के प्राथमिक विद्यालय बताया जा रहा है जहां पर के प्राथमिक विद्यालय स्थित है वहां पर मात्र एक शिक्षक मौजूद हैं जिसका नाम महेश आनंद सिंह है इस विद्यालय में मात्र दो कमरा एवं एक रसोईघर उपलब्ध है जिसमें के विद्यालय के छात्र छात्रा जान अपने जोखिम में डालकर के पढ़ाई करते हैं विद्यालय के छात्र इतनी जर्जर हो चुकी है कि अब वह पूरी तरह से छोड़ छोड़ चुकी है चल छोड़ कर के गिर रहा है उस विद्यालय के भवन में  कभी भी बड़ी घटना का अंजाम दिया जा सकता है इतना ही नहीं विद्यालय में कुल 56 बच्चा नामांकन है जिसमें की 30 से 40 बच्चे हर रोज उपस्थित होते हैं उस बच्चे को मध्यान भोजन देने में भी बहुत बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है वर्तमान में विद्यालय में 3 चापाकल स्थित है लेकिन बड़ी ही दुखद के स्थिति के साथ कहना पड़ रहा है कि तीनों का तीनों चापाकल खराब पड़ा हुआ है जिसमें के रसोइयों के द्वारा खाना बनाया जाता है दूसरे के घर से पानी लाकर के भोजन बनाती है और बच्चे को बड़े ही कष्ट से मध्यान भोजन खिलाती है प्रभारी प्रधानाध्यापक द्वारा यह बताया गया कि चापाकल खराब होने की सूचना हमने अपने विभाग को 13/ 4/ 2023 में दिया है एवं इसके पहले विद्यालय की जर्जर भवन हो जाने की स्थिति तो हमने प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को रूप से अवगत कराया है पर अभी तक किसी तरह का कोई कार्यवाही नहीं किया गया है इससे स्पष्ट जाहिर होता है कि शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारी इतनी कुंभकरण की नींद में सोई हुई रहती है इसका कोई विवरण नहीं किया  जा सकता है इसके अलावे विद्यालय में एकमात्र शिक्षक होने के कारण कभी बीएलओ के कार्य अभी जनगणना के कार्य एवं कभी आधार सेटिंग का कार्य जैसे कार्यों को लेकर के शिक्षक अस्त व्यस्त रहते हैं विद्यालय की पढ़ाई बाधित होते रहती है  अभी अभी बिहार सरकार के द्वारा नए नियम लागू किए गए हैं कि हर रोज विद्यालय के बच्चे की उपस्थिति शत-प्रतिशत करने को लेकर के विद्यालय को किसी ने किसी अधिकारी के द्वारा हर रोज निरीक्षण करवाया जाता है पर निरीक्षण करने से कोई फायदा नहीं होता है बच्चे की उपस्थिति विद्यालय में नहीं देखी जा रही है क्या स्पष्ट जाहिर होता है कि विद्यालय का निरीक्षण करना सिर्फ कागज पर सीमित करके ही रह जा रहा है


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