बांका:चांदन प्रखंड भर में लगातार कई बर्षो से फर्जी जमाबंदी पर जमीन के दखल की खबर छपती आ रही है।यहां तक कि हाल ही में एक सरकारी पोखर की जमाबंदी भी दर्ज होने की खबर के बाद सीओ की काफी फजीहत हुई थी। उसके बाद से सरकारी,वनविभाग की जमीन की जमाबंदी फर्जी तरीके से जमीन माफिया द्वारा दर्ज कराने की जांच के बाद एडीएम माधव प्रसाद सिंह द्वारा करीब 240 एकड़ जमीन की जमाबंदी फर्जी बताकर रद्द किया जा चुका है। जिस कारण फर्जी तरीके से जमाबंदी बनवाने वाल भू माफिया की नींद हराम हो गई है। इतना ही नहीं अभी भी एडीएम के न्यायालय में सैकड़ों मामले जमाबंदी रद्द करने के लंबित हैं। जिसमें से अधिकतर मामले बिहार सरकार और वन विभाग की जमीन का फर्जी तरीके से जमाबंदी बनाने का बताया जाता है। हाल ही में सबसे अधिक जमाबंदी सिलजोरी, बिरनिया,चांदवारी पंचायत में रद्द किया गया है। मुख्य रूप से जो जमाबंदी रद्द की गई उसमें बिरनिया पंचायत के मौजा बिरनिया के जमाबंदी नम्बर 74,79,और 148 मौजा बांक 821 गोपडीह में वन विभाग की दो एकड़ 83 डिसमिल जमीन,मौजा चांदवारी 42,56,57,मौजा जटवारा 200,201मौजा डूमरकोला 25 मौजा हड़खार 26,70,151 मौजा झाझा 21,136,170,171 मौजा मथुरा 95 मौजा चांदन 118,199,261 की जमाबंदी को एडीएम द्वारा रद्द किया जा चुका है। साथ ही साथ जिलाधिकारी बांका अंशुल कुमार द्वारा सभी रद्द जमाबंदी वाली जमीन की जल्दी से जल्दी नापी कराकर उसकी घेराबंदी करने के साथ-साथ वृक्षारोपण करने का आदेश अपने पत्रांक 2553 दिनांक 20 जुलाई 2023 के आलोक में उप विकास आयुक्त और वन प्रमंडल पदाधिकारी बांका को सूचित किया गया है। और जल्द से जल्द वृक्षारोपण कर उसकी रिपोर्ट जिला को सुपुर्द करने को कहा गया है। इस संबंध में सीओ प्रशांत शांडिल्य ने बताया कि जो भी जमाबंदी रद्द की गई है उसे सीमांकित कर जल्दी ही वृक्षारोपण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। साथ ही साथ अन्य लंबित सभी आवेदन की जमाबंदी भी रद्द होने की संभावना बनी हुई है। इससे साफ जाहिर है कि इस प्रखंड में जमीन माफिया और पूर्व के कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर बिहार सरकार और वन विभाग की जमीन का जमाबंदी मनमाने ढंग से कर जमीन का बंदरबांट किया गया है।

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