तरह तरह के कांवरिया, तरह तरह के भोजन

तरह तरह के कांवरिया, तरह तरह के भोजन

बांका:विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस बीच रोजाना लाखों कांवरिया गंगाधाम से बाबाधाम तक कि यात्रा बोलबम के जयकारे के साथ पूरा कर रहे है। इस बर्ष दो माह तक चला श्रावणी मेला में तरह तरह के कांवरिया अपनी मनोकामना को लेकर इस यात्रा पर निकल कर बाबा की पूजा आराधना कर चुके है। इस यात्रा में सबसे अधिक वैसे पैदल यात्री होते है जो गंगाधाम से जल लेकर बाबाधाम तक आते है।जिसके लिए कोई समय सीमा नही होती है। ये यात्री तीन दिनों से पांच दिनों में अपनी यात्रा पूरा करते है। जबकि इस यात्रा में रविवार और सोमवार को पूरे कांवरिया पथ पर डाकबमो का बोलबाला होता है। यह डाकबम जल उठाने के बाद सिर्फ 24 घंटे में बाबा पर जलार्पण करते है।वही कुछ कांवरिया दंडी बम बन कर यात्रा करते है। जो इस पथ पर सबसे कष्टदायक माना जाता है। ये बम अपने पूरे शरीर को धरती पर रख कर बाबाधाम जाते है। जिसके लिए दो से तीन माह का समय लगता है।इस बम के साथ कुछ स्वजन भी उनके सहयोग में उनके साथ होते है।इनकी संख्या लगभग सालों भर पाई जाती है। इस पैदल कांवरिया में अधिकतर कांवरिया हर प्रकार का भोजन कर अपनी यात्रा पूरा करते है। जबकि कुछ कांवरिया उपवास कर डाकबम में यात्रा करते है। जबकि कुछ सिर्फ फलाहारी कुछ अरवा औऱ कुछ तो बेलपत्र खाकर  ही अपनी यात्रा करते है। पटनिया धर्मशाला में आराम कर रहे पटना के सुबोध बम बताते है कि वे लगातार चौथे बर्ष सिर्फ बेलपत्र खाकर अपनी यात्रा करते है। उनका एक पुत्र गंभीर बीमारी से बच गया। उसी समय से वह इस यात्रा पर है। धनबाद के राजू बम लगातार 14 बर्ष से सिर्फ फलाहार पर बाबा को जल अर्पण कर रहे है। जबकि सहरसा की संजू बम और गिरिधारी बम सिर्फ अरवा खाकर दस बर्ष से सावन में बाबा को जलार्पण करते है।



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