कांवरिया पथ का पसंदीदा पड़ाव है गोड़ियारी नदी

कांवरिया पथ का पसंदीदा पड़ाव है गोड़ियारी नदी

बांका:मलमास समाप्ति के बाद सावन का दुसरा चरण अपने पूरे उफान पर है। सम्पूर्ण कांवरिया पथ केशरिया वस्त्रधारी और बोलबम में जयकारे से गुंजायमान हो रहा है। लेकिन इन सब के बीच कांवरिया के लिए गोड़ियारी नदी सबसे पसंदीदा पड़ाव बन गया है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में गंगा धाम से बाबा धाम तक की यात्रा के दौरान कांवर उठाने के बाद कांवरिया को कई शिविरों में ठहरने के बाद भी जहां उसकी थकान कम नहीं होती है। वही इस गोड़ियारी नदी में कांवरिया को एक नई संजीवनी मिल जाती है। कांवरिया यहां घंटो पानी में उतरकर जल क्रिया करने के बाद पीछे की साइड थकान भूल जाते हैं। और फिर नए उत्साह के साथ महज चंद किलोमीटर शेष अपनी मंजिल की ओर रवाना होते हैं। मधुबनी के मनोज बम,राजेश बम,बेगूसराय के संदीप बम,कोलकता के पंकज बम औऱ दरभंगा की सुनैना बम कहती है कि इस नदी के पानी मे पैर रखते ही हमारी थकान पूरी तरह मिट जाती है। इसलिए हमलोग इस नदी में कुछ देर रुक कर आराम करते है।पूरे सावन में गोड़ियारी नदी का नजारा देखने लायक होता है। सुबह से देर शाम तक कांवरिया के यहां भीड़ लगी रहती है। नदी में सजने वाले चाय, नाश्ता और आग पर पका कर बेचा जाने वाला मकई की यहां खूब बिक्री होती है। साथ ही साथ नदी के पानी में सजने वाले छोटी-मोटी दुकानों में लाल हरा फाइबर की  कुर्सी लगाकर कांवरिया पानी में बैठकर ही नाश्ता का आनंद उठाते हैं।कांवरिया  के मनोरंजन के लिए यहां घुड़सवारों का दल भी मौजूद रहता है। कांवरिया घोड़े पर सवार होकर इसका आनंद ले लेते हैं। फोटोग्राफरों का दल भी यहां मौजूद रहता है लेकिन मोबाइल के इस युग में फोटोग्राफरों की आमदनी में काफी कमी हो गई है। लेकिन उसकी संख्या पूर्व की तरह बरकरार है। जो कांवरिया के लिए फोटोग्राफी करता है 11 महीने तक वीरान रहने वाला गोड़ियारी नदी सावन माह में बड़ा पिकनिक स्पॉट बन जाता है। जहां दिन और रात में कोई फर्क ही नहीं होता, अगर इस गोड़ियारी नदी में जिला प्रशासन द्वारा समुचित रोशनी और शौचालय औऱ महिलाओं के लिए चेंजर रूम  की व्यवस्था कर दी जाए तो इस नदी में चार चांद लग जाएगा। और यहां कांवरिया की संख्या औऱ अधिक बढ़ जाएगी। लेकिन जो भी हो गोड़ियारी नदी  गंगाधाम से बाबाधाम तक जाने वाले कांवरिया के लिए सबसे चहेता पड़ाव बनता जा रहा है। इसलिए प्रशासन द्वारा यहां कांवरिया की सुरक्षा के लिए अस्थाई थाना भी बनाया जाता है।



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