चम्पारणनीति/ बेतिया(प.च.) कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर में आज 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया गया!
इस अवसर पर केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह सभी मधुमक्खी पालकों को विश्व मधुमक्खी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए, बताया कि हर साल 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है।आज का दिन मधुमक्खियां और मधुमक्खी पालन के महत्व को याद कराता है और उन्हें बचाने के लिए जागरूकता फैलाने का एक अवसर प्रदान करता है!
विश्व मधुमक्खी दिवस मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने की थी। 20 मई को ही आधुनिक मधुमक्खी पालन की तकनीक का नेतृत्व करने वाले एंटोन जनसा का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिवस को उनके जन्मदिन के उपलक्ष में मनाया जाता है!
मधुमक्खियां, परागणक की अत्यंत महत्वपूर्ण श्रेणी मे आते हैं। मधुमक्खियां धरती पर परागण का सबसे जरूरी जरिया हैं, जिससे फल, सब्जियां और अनाज का उत्पादन होता है!
इनके द्वारा परागण से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है! यह जैव विविधता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं! साथ ही शहद का उत्पादन करती हैं, जो एक स्वादिष्ट, पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर होता है!
इसी क्रम मे पौधा रोग विशेषज्ञ श्री सौरभ दुबे इनके पालन से संबंधित प्रमुख जानकारी साझा करते हुए बताया की मधुमक्खी पालन से बेरोजगार युवक युवतियों एवं किसान भाइयों को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होता है। मधुमक्खी पालन में कम समय, धन और बुनियादी ढांचे के निवेश की आवश्यकता होती है।
कम कृषि मूल्य वाले क्षेत्र में मधुमक्खी पालन द्वारा शहद और मोम का उत्पादन और आमदनी का अच्छा स्रोत बनया जा सकता है।
मधुमक्खी पालन का खेती मे अत्यंत सकारात्मक परिणाम होते हैं जिससे फसल उत्पादन मे वृद्धि होती है! मधुमक्खी पालन एक किसान या किसान समूहों द्वारा शुरू किया जा सकता है।
यदि कोई भी व्यक्ति मधुमक्खी पालन करना चाहता है तो वह तीन-चार बॉक्स से इसे कुटीर उद्योग के रूप में शुरुआत कर सकता है।
*विश्व मधुमक्खी दिवस का महत्व*
विश्व मधुमक्खी दिवस मधुमक्खियों के महत्व और उनसे जुड़े खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने का अवसर प्रदान करता है !
मधुमक्खियों को बचाने के लिए सुरक्षा उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित करना।
मधुमक्खी पालकों, किसानों, सरकारों और नागरिकों को मधुमक्खियों की सुरक्षा के लिए सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना।
*इन बातों का रखना होगा ख्याल*
फसलों में केमिकल का कम इस्तेमाल करें और ऑर्गेनिक खेती को अपनाएं जिससे मधुमक्खियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके ।
अपने घरों, बगीचों और खेतों में मधुमक्खियों के लिए फूलों वाले पौधे लगाएं.
लोकल शहद का इस्तेमाल करें और बीकीपर्स के काम को बढ़ावा दें!
मधुमक्खियों के महत्व और उनसे जुड़े खतरों के बारे में जागरूकता फैलाएं!
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के विशेषज्ञ डॉ धीरू तिवारी, डॉक्टर रीता देवी एवं अन्य सभी कर्मचारी मौजूद रहे।
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