नदियों पर गहराता संकट: डा.योगेंद्र




चम्पारणनीति/ बेतिया(प.च.)
देश में नदियों पर गहरा संकट है। 2016 में मैं अन्य साथियों के साथ कोलकाता से गंगोत्री तक की यात्रा की थी। सबकुछ मैंने करीब से देखा था। गंगा की तकलीफें बढ़ती ही जा रही हैं और बढ़ते जा रहे हैं मछुआरों के संकट । गंगा में मछलियाँ बहुत कम हो गयी हैं, उस पर वन विभाग और गुंडों का कहर । मैं जब एम. ए. में था, तब गंगा मुक्ति आन्दोलन से जुड़ा था। इस पर एक किताब ' गंगा को अविरल बहने दो' का संपादन सफदर के साथ मिल कर किया। 
आज आमंत्रण में गंगा मुक्ति आन्दोलन की बैठक हुई, जिसमें मुख्य रूप से कहलगांव, नवगछिया और भागलपुर के मछुआरे थे। उन्होंने अपना दुःख दर्द व्यक्त किया और कहा कि वन विभाग के ज़ुल्म से वे परेशान हैं। वे हमारा जाल छीन लेते हैं और प्रताड़ित करते हैं। उनके दफ्तर से शिकारमाही के लिए परिचय पत्र भी प्राप्त है। उनके जुल्म के खिलाफ 17 जून को कहलगांव से भागलपुर के लिए नौका जुलूस निकाला जायेगा और 18 जून को जिलाधिकारी के समक्ष जल सत्याग्रह किया जायेगा।
मुझे गंगा मुक्ति आन्दोलन का संयोजक और गौतम को प्रेस प्रवक्ता बनाया गया। आने वाले दिनों में गंगा सहित तमाम नदियों पर काम करने वाले लोगों को बुलाया जायेगा। गंगा का बचना जरूरी है, वरना देश भी नहीं बच पायेगा। इस सांस्कृतिक नदी को मारने का पूरा इंतजाम हो चुका है। कहीं कहीं तो गंगा नाले की तरह होती जा रही है।

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