रेलवे ने रात के अंधेरे में जेसीबी से खुदाई कर किया ओड़हारा जाने वाली सड़क मार्ग को अवरुद्ध
रजौन,बांका,भागलपुर-मंदारहिल रेलखंड के विस्तारीकरण एवं इस रेलखंड पर कई एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन होने के बाद इस रेलखंड होकर गुजरने वाली विभिन्न गैर मानवरहित समपार फाटक वाले मार्गों को बंद करने की दिशा में रेलवे प्रशासन ने एक ओर जहां एक बार फिर से कार्रवाई तेज कर दी है, वहीं दूसरी ओर रेलवे प्रशासन को जगह-जगह ऐसे सड़क मार्गों से लाभान्वित ग्रामीणों के भारी विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। मालूम हो विगत 7 मई दिन मंगलवार की मध्य रात्रि इस रेलखंड को पार कर आनंदपुर गांव तक जाने वाली संपर्क पथ को जेसीबी की मदद से अवरुद्ध करने पहुंची रेलवे के मजदूरों को ग्रामीणों का भारी विरोध का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद मजदूरों ने खुदाई किए हुए संपर्क पथ को फिर से भरकर वहां से वापस लौटना मुनासिब समझा था, वहीं दूसरी ओर विगत 8 मई दिन बुधवार की मध्य रात्रि प्रखंड के ओड़हारा गांव तक जाने वाली सड़क मार्ग में इस रेलखंड के दोनों ओर जेसीबी की मदद से बड़ा-बड़ा गड्ढा खोद दी गई है, जिसको लेकर ओड़हारा के ग्रामीणों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। इस सम्बंध में ओड़हारा के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव को भागलपुर-हंसडीहा मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने वाली यह एक मात्र सड़क मार्ग है, जिसे रेल प्रशासन द्वारा बार-बार रात के अंधेरे में जेसीबी आदि की मदद से अवरुद्ध किया जाता आ रहा है। ग्रामीणों ने आगे बताया कि इस सड़क मार्ग पर समपार फाटक देने को लेकर उनलोगों ने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासनिक स्तर के माध्यम से रेलवे प्रशासन को सूचना देने का काम किया है, इसके बावजूद यहां समपार फाटक देने की बजाय रेलवे विभाग ग्रामीणों को यातायात से पूरी तरह बेदखल कर देना चाह रही है। ग्रामीणों ने कहा कि रेलवे ने रात के अंधेरे का फायदा उठाकर चोरों जैसी हरकत की है। वहीं ओड़हारा पंचायत के तेजतर्रार व युवा मुखिया प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि वे मानते हैं कि रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस अवैध रेलवे क्रॉसिंग को बंद किया है, लेकिन जिस गांव-समाज का रास्ता रेलवे प्रशासन ने बंद किया है, उससे पूर्व इस समाज के लोगों के आवागमन के लिए रेलवे प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करना चाहिए था तथा उन्होंने डंके की चोट पर कहा कि जिस रास्ते को रात के अंधेरे में बंद किया गया है, उसे दिन के उजाले में बंद करने आना चाहिए था, ताकि यहां के लोग डीएम और एसडीओ के पास जाकर गुहार लगाते, लेकिन रेलवे प्रशासन ने 12 बजे रात में आकर जिस तरह से रास्ते को अवरुद्ध किया है, इससे यही लग रहा है कि रेलवे प्रशासन इस समाज के लोगों को जीवन जीने से मजबूर कर रहा है, अगर रेलवे प्रशासन को ओड़हारा के ग्रामीणों से ज्यादा तकलीफ है तो यहां पर बसने वाले लोगों के जमीन को खरीदकर उन्हें कहीं और बसा दें ताकि वे लोग सुरक्षित रहते हुए सकुशल जीवन यापन कर सके। उन्होंने कहा कि सड़क मार्ग के बाधित होने से इस गांव में अगर किसी को बीमारी आदि की वजह से आनन-फानन में एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाना हो तो यहाँ तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाएगी, यहां के जो बच्चे बांका या रजौन पढ़ने गए हुए हैं उन्हें भागलपुर-हंसडीहा मुख्य सड़क मार्ग स्थित ओड़हारा मोड़ से करीब 2 किलोमीटर दूर अवस्थित अपने गांव तक पैदल आना पड़ेगा। उन्होंने आगे बताया कि ओड़हारा पंचायत मुख्यालय इसी गांव में पड़ता है, जहां इसी रास्ते से होकर उन्हें जाना पड़ता है, इस गांव में इंटर स्तरीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, अस्पताल व कृषि फॉर्म के साथ-साथ कई अन्य सुख-सुविधाएं हैं, इसके बाद भी रेलवे प्रशासन ने रात के अंधेरे में इस गांव तक जाने वाली सड़क मार्ग को बाधित किया है, जिसका वे घोर निंदा करते हैं।
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