कर्मवीर की प्रतिमा और एक नया आयाम

कर्मवीर की प्रतिमा और एक नया आयाम



माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय का इतिहास अपने आप में गौरवशाली रहा है। यह संस्थान न केवल पत्रकारिता शिक्षा का केंद्र है, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सरोकारों का भी पोषक रहा है। इसी क्रम में हाल ही में विश्वविद्यालय परिसर में कर्मवीर माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा का अनावरण हुआ। यह केवल एक अनावरण समारोह नहीं था, बल्कि विश्वविद्यालय के आत्मबोध और पहचान का क्षण भी था।

यह कार्य विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति विजय मनोहर तिवारी जी के नेतृत्व में संभव हुआ है। तिवारी जी का दृष्टिकोण केवल औपचारिक प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संस्थान को उसके असली गौरव से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। यह प्रतिमा मात्र लोहे और पत्थर की आकृति नहीं है, यह पत्रकारिता, स्वतंत्रता संग्राम और जनसेवा की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसे माखनलाल जी ने अपने लेखन और कर्म से जीवित रखा।

लंबे समय से विश्वविद्यालय में यह कमी महसूस की जा रही थी कि संस्थापक प्रेरणा पुरुष की कोई भौतिक स्मृति यहाँ नहीं है। यह कार्य बहुत पहले होना चाहिए था, पर देर आए दुरुस्त आए की तर्ज़ पर अब यह ऐतिहासिक कदम उठा है। यह आने वाली पीढ़ियों को न केवल उनके योगदान की याद दिलाएगा, बल्कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

आज जब मीडिया और पत्रकारिता पर व्यावसायिकता और बाज़ारवाद का दबाव है, ऐसे समय में माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा हमें यह स्मरण कराती है कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम है। "कर्मवीर" नामक स्मारक इसका जीवंत उदाहरण है।

इस अवसर पर मौजूद विश्वविद्यालय परिवार और आम नागरिकों की आँखों में जो गर्व और खुशी थी, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि यह कार्य विश्वविद्यालय को नई दिशा देने वाला है। विजय मनोहर तिवारी जी का यह प्रयास न केवल सराहनीय है, बल्कि इसे विश्वविद्यालय की नई पहचान कहा जा सकता है।

आज का दिन इतिहास में इस रूप में दर्ज होगा कि माखनलाल विश्वविद्यालय ने अपने पथप्रदर्शक को सच्ची श्रद्धांजलि दी। यह केवल स्मरण का कार्य नहीं, बल्कि संकल्प का क्षण है—कि पत्रकारिता को पुनः उसकी मूल आत्मा और मूल्य आधारित दिशा दी जाए।

— आदित्य कुमार दुबे, संपादक, चम्पारण नीति

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