एलपीजी आपूर्ति के दावों पर सवाल—क्या वाकई सुधरी है व्यवस्था?

एलपीजी आपूर्ति के दावों पर सवाल—क्या वाकई सुधरी है व्यवस्था?



बेतिया, 23 मार्च। पश्चिम चम्पारण में जिला प्रशासन द्वारा एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिला जनसम्पर्क कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि एक दिन में 12,092 बुकिंग के मुकाबले 13,258 सिलेंडर की डिलीवरी की गई। प्रशासन इसे लंबित बुकिंग के निपटारे का संकेत बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक दिन के आंकड़े पूरे सिस्टम की मजबूती साबित नहीं करते। सवाल यह भी है कि अगर पहले से लंबित बुकिंग थीं, तो उनकी संख्या कितनी थी और उन्हें निपटाने में कितना समय लगा?
प्रशासन ने 21,101 सिलेंडरों के स्टॉक उपलब्ध होने की बात कही है, जो सतही तौर पर पर्याप्त प्रतीत होता है। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि कई इलाकों में अब भी समय पर डिलीवरी नहीं हो रही है और गैस एजेंसियों द्वारा देरी या अतिरिक्त शुल्क की शिकायतें मिलती रही हैं।
अपर समाहर्ता सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी अनिल कुमार सिन्हा के नेतृत्व में सख्ती और निगरानी की बात जरूर कही गई है, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि व्यवस्था पहले से ही नियंत्रण में है, तो अनियमितताओं की शिकायतें लगातार क्यों सामने आती रही हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल निरीक्षण और छापेमारी के दावे काफी नहीं हैं। जरूरी है कि प्रशासन शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत करे, एजेंसियों की जवाबदेही तय करे और डिलीवरी की वास्तविक समय-सीमा सार्वजनिक करे।
कुल मिलाकर, प्रशासन के दावे सकारात्मक जरूर हैं, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को समय पर और पारदर्शी सेवा नहीं मिलती, तब तक इन दावों पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है।

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