मनरेगा के सरकारी पोर्टल से बिल डिलीट कर फर्जी भुगतान की बड़ी साजिश, वेंडर ने अधिकारियों पर लगाया डेटा हेरफेर का गंभीर आरोप

मनरेगा के सरकारी पोर्टल से बिल डिलीट कर फर्जी भुगतान की बड़ी साजिश, वेंडर ने अधिकारियों पर लगाया डेटा हेरफेर का गंभीर आरोप

रजौन,बांका :- रजौन प्रखंड के भवानीपुर-कठौन पंचायत में मनरेगा योजना के तहत एक सनसनीखेज भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है, जहां 'मां लक्ष्मी एंटरप्राइजेज' के प्रोपराइटर फूलकुमारी देवी, पति प्रियेश कुमार सिंह ने विभागीय अधिकारियों पर सरकारी पोर्टल से पुराने बिलों का डेटा गायब करने और दूसरी फर्म के नाम पर फर्जी एंट्री कर सरकारी राशि हड़पने का संगीन आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी फर्म ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में पंचायत के विकास कार्यों के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति की थी, जिसके बिल और एम.एल. नम्बर (मिजरमेंट लिस्ट) पोर्टल पर दर्ज थे, लेकिन 3 अप्रैल 2026 को पोर्टल चेक करने पर पता चला कि उनके सभी पुराने रिकॉर्ड्स को डिलीट कर दिए गए हैं और उनकी जगह 'मां काली एंटरप्राइजेज' के नाम से फर्जी बिल चढ़ाकर अवैध तरीके से भुगतान निकालने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में पीड़ित वेंडर ने सीधे तौर पर रजौन के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार और रोजगार सेवक हलदर सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए जिलाधिकारी सहित अन्य वरीय पदाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। वेंडर का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिसके विरोध में उन्होंने बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया है, जिसकी आधिकारिक सुनवाई 15 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिससे अब पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं इस पूरे मामले पर मनरेगा पीओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि वे अभी बाहर हैं और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, जबकि पीआरएस हलधर सिंह ने अपना बचाव करते हुए बताया कि यह मामला उनके कार्यकाल का नहीं है। फिलहाल, पोर्टल से डेटा का गायब होना तकनीकी जांच का विषय बना हुआ है।
रिपोर्ट:- केआर राव 

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