सत्ता परिवर्तन के बीच रजौन में बिजली संकट गहराया: 'फॉल्ट' और अघोषित 'लोड शेडिंग' से जनता त्रस्त, घंटों गायब रहती है बिजली

​रजौन,बांका :-बिहार की राजनीतिक फिजा बदलते ही, नीतीश कुमार के राज्यसभा गमन और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री की कमान संभालते ही रजौन प्रखंड की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। वर्तमान में पूरा प्रखंड अघोषित लोड शेडिंग की चपेट में है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कटौती की स्थिति इतनी गंभीर है कि इसका कोई निश्चित समय तय नहीं है। दिन हो या रात, जब मन तब बिजली कट जाती है और फिर घंटों गायब रहती है। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी आंधी-तूफान या खराब मौसम के भी विद्युत विभाग लगातार 'फॉल्ट' का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है। जब भी उपभोक्ता शिकायत करते हैं, तो कर्मचारी तकनीकी खराबी का हवाला देते हैं, जो सीधे तौर पर विभाग के ढुलमुल प्रबंधन को दर्शाता है। गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ ही इस अनियमित आपूर्ति ने टेलीकॉम और इंटरनेट सेवाओं को भी पंगु बना दिया है। घंटों बिजली गुल रहने से टावरों का पावर बैकअप फेल हो जाता है, जिससे लोगों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है। आम जनता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि जब से सरकार ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की है, तब से मेंटेनेंस और निरंतर आपूर्ति की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि मुफ्त बिजली की घोषणा केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है, क्योंकि असलियत में उन्हें घंटों बिजली कटौती और अंधेरे की मार झेलनी पड़ रही है। यदि विभाग ने समय रहते विद्युत लोड के प्रबंधन और व्यवस्था के सुधार पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली भीषण गर्मी में स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है।
रिपोर्ट:-केआर राव 

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