चम्पारण नीति/बेतिया(प.च.) समेकित खेती एवं फसल विविधीकरण ने पश्चिम चंपारण के किसानों को दिखाई नई राह : पश्चिम चंपारण के किसानों के लिए कृषि विज्ञान …
पटना, 27 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रारंभ संपूर्ण हिंदू समाज के संगठन के लिए हुआ था। संघ के संस्थापक डॉक…
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बांका/भागलपुर : भागलपुर प्रमंडलीय आयुक्त अवनीश कुमार ने बांका जिले में राजस्व कार्यों की धीमी रफ्तार और लंबित मामलों को लेकर…
77वें गणतंत्र दिवस पर रजौन में आन, बान और शान से लहराया गया राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, चहुंओर गूंजे देशभक…
(संपादक -आदित्य कुमार दुबे)
"चम्पारण नीति " की नीति
सादगी, जबरदस्त जोश और चेहरे पर एक दृढ़ संकल्प लिए। बिना किसी लोभ व लालच अथवा किसी द्वेष के कारण नहीं, बल्कि असहाय , पीड़ितो और अत्याचारों से भरी फरियादों की, जो अनसुनी कर दी जाती है। "चम्पारण नीति " ढ़ाल बन कर उन शोषितों की पीड़ा को सबके समक्ष रखने का कार्य करेगा। निर्भीकता के साथ सरकार और उसके अधिकारियों की आलोचना,जनता की कठिनाईयों की चर्चा करने से कभी पीछे नहीं हटेगा। किसी की प्रशंसा या अप्रशंसा , किसी की प्रसन्नता या अप्रसन्नता, किसी की घुड़की या धमकी , हमें अपने सुमार्ग से विचलित न कर सकेगी । साम्प्रदायिक और व्यक्तिगत झगड़ों से "चम्पारण नीति" सदा अलग रहने की कोशिश करेगा । इसका जन्म किसी विशेष सभा, संस्था, ख्याति या मत के पालन- पोषण, रक्षण या विरोध के लिए नहीं हुआ है, किंतु इसका मत स्वतंत्र विचार और इसका धर्म सत्य होगा । मनुष्य की उन्नति भी सत्य की जोत के साथ होती है । इसीलिए सत्य को दबाना हम महापाप समझेंगे और इसके प्रचार और प्रकाश को महापुण्य!
-: आदित्य कुमार दुबे
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