कुमार आनंद झा, बाँका ।
*रिपोर्ट*:- एक तो कुदरती कोरोना के संक्रमण का कहर, ऊपर से उसपर जनप्रतिनिधियों का ये ठसक.. मजलूम मनरेगा मजदूरों का जीना हराम कर ही छोड़ेगा क्या जनाब ??
भगवान भला करे इस कोरोना के माई का जिसने भारत आकर वर्षों से चल रहे धांधली और उगाही का पर्दाफाश करना शुरू कर दिया है ।
ताजा मामला जिले के बाँका प्रखण्ड अंतर्गत लकड़ीकोला पंचायत के ग्राम बैसा-रामपुर, लैया टोली का है जहाँ लॉकडौन के बाद से आमद और काम पर आफत आयी तो ग्रामीण मजदूर अपने बैंक खाते की जांच हेतु बैंक अथवा सीएसपी संचालक के पास गए जहां इन्हें ज्ञात हुआ कि इनके खाते में वर्तमान में एक भी रुपैया मौजूद नही है परंतु पूर्व में किये गए काम के एवज में जो भी रकम आयी थी उसकी निकासी हो गयी, जबकि ये पैसा लाभुकों के हाथ नही लगा है जो बैंक के भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़ा करती है ,हालांकि कुछ महिला मजदूर ने हमसे बात करते हुए कहा कि एक दो बार उनसे अंगूठे के टिप लिया गया परंतु लाल जलने के बाद कहा गया कि पैसा नही आया है,जबकि सबों के खाते से हजारों हजार तक कि निकासी हुई है लेकिन उन्हें कभी ये पैसा नसीब नही हुआ,हालांकि मनरेगा मजदूरों ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि गाहे बगाहे काम करवाने पर उन्हें ठेकेदारों द्वारा 200 मजदूरी शाम में मिल जाया करता था, लेकिन बांकी के दिन हमारे हिस्से के मजूरी के पैसे किसने निकाले पता नही, ये जानकारी मिलने पर की मनरेगा खाते में पैसा आने वाला है तो आर्थिक तंगी से बचने हेतु जब सभी जॉब कार्डधारी बैंक पहुँचे तो मामला उजागर हुआ ।
बताते चलें कि केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक प्रदेशों के सरकार से विशेष आदेश पर ग्रामीण क्षेत्रों में 20 अप्रैल के बाद से ही मनरेगा योजना और बिहार पंचायती राज के सात निश्चय आदि कामों का क्रियान्वयन के आदेशोपरांत समुचित समाजिक दूरी के साथ ही कई पंचायतों में कार्य प्रारंभ भी करवाया गया जिससे मजदूर लाभान्वित हो सके...परंतु जहां जनप्रतिनिधियों, बैंककर्मियों और दलाल ठेकेदारों के मदद से गबन का खेल चल रहा हो वहां के जरूरतमंद मजदूर का क्या होगा ये प्रशासन के विवेक और कार्यशैली पर निर्भर करता है ।
इस बाबत हमसे ग्रामीण मजदूर कैलाश लैया,गुलशन कुमार,इंदर लैया,हेमा देवी,श्रीधर लैया आदि ने बातचीत में बताया कि उनका क्रमसः 36000,53000 और 75 हजार जैसा बड़ा रकम बिना जानकारी के ही खाते से निकल गया और हमें एक भी पैसा लाभ नही मिला और ग्रामीण युवा गोपाल मोहली के मुताबिक उनके पिता के जॉबकार्ड पर नाम,पता उनका तो है परंतु फोटो किसी और का,इसलिए आजतक हर लाभ से वंचित रह गये ऐसे में उन्होंने पैसा गबन का आरोप पंचायत के मुखिया निवास मंडल,वार्ड सदस्य विजय यादव और ग्रामीण सीएसपी संचालक दिवाकर मंडल पर लगाया है,हालांकि आरोप सिद्ध करना प्रशासनिक जांच के दायरे में है ।
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