चम्पारण नीति के लिये मनीष कुमार और अन्य की रिपोर्ट
एक पुरानी कहावत है "जब सैयां भये कोतवाल तो डर काहे का"
यह कहावत चरितार्थ हुई नरकटियागंज में जब SDM के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया इस समारोह का आयोजन टाउन क्लब नरकटियागंज ने किया था और जाहिर सी बात है कि जब समारोह में खुद SDM और उनकी पत्नी उपस्थित हो कौन नियमो की परवाह करे ।
बिना मास्क घूमने वालो से फाइन वसूलने वाला प्रशासन यहां पर आँखे बन्द कर लेगा अगर समारोह की तस्वीरों को देखा जाय तो शायद ही किसी ने मास्क लगाने की कोशिश की हो आखिर क्यों हुआ ऐसा तो शायद एक बड़ी वजह रही होगी कि जब खुद SDM साहेब है तो डर कैसा हालांकि समारोह में खुद SDM साहेब और उनकी पत्नी भी बिना मास्क फ़ोटो खिंचवा रही थी। क्या प्रशासन सो रहा था या उसका काम सिर्फ आम जनता से मास्क नही लगाने का शुल्क वसूलना है।
आप खुद अंदाज लगा सकते है कि जब एक जबाबदेह अफसर खुद इस तरह से नियमों की अवहेलना करेगा तो कैसे उससे जबाबदेही की आशा की जा सकती है




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