भारतीय सिनेमा से गायब है भारतीय संस्कृति : विवेक अग्निहोत्री

भारतीय सिनेमा से गायब है भारतीय संस्कृति : विवेक अग्निहोत्री


बेतिया। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय , मोतिहारी के मीडिया अध्ययन विभाग ने 'नेपॉटिज्म इन इंडियन सिनेमा: इश्यूज एंड कन्सर्न' विषय पर गुरूवार को अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि  प्रख्यात फिल्म निर्देशक  विवेक अग्निहोत्री रहे । अग्निहोत्री ने भारतीय सिनेमा पर अपना विचार रखते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा से भारत की आत्मा गायब है। जिनके पास हिंदी की कमजोरी होती है । वह उर्दू लाकर भर देते हैं । फिल्मी गीतों में उर्दू शब्द आखिर कहां से आया ? 
भारतीय सिनेमा के मठाधीशों  के संस्कार पर अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय सिनेमा के मठाधीश हुनरमंद यूवा को जगह नहीं देते हैं। जिनके पास हुनर नहीं होता है । ऐसे लोगों को लाकर या अपने परिवार के सदस्यों को लाकर पुस्त दर पुस्त भारतीय सिनेमा के मठाधीश बन अपनी रोटी सेकते हैं । इसका उदाहरण उन्होंने  राजनीति परिवारवाद को भी दिया । आगे कहाँ की  कोई भी नौजवान युवा जब भारतीय सिनेमा में अपना पैर पसारता है ,तो सिनेमा में जमे हुए कुछ पुराने लोग उस को कुचलने की तैयारी में लगे रहते हैं , जो कि राष्ट्र के लिए बहुत ही घातक है । उदाहरण सुशांत सिंह राजपूत को बताया । 
विवेक अग्निहोत्री  ने आगे कहाँ की "बॉलीवुड में नेपोटिज्म का मतलब यह नहीं है कि आप अपने बेटे या बेटी को काम देते हैं उसमें कुछ गलत बात नहीं है। अगर आपके बेटे में काबिलियत है वह अच्छा सिंगर है, वह किसी प्रकांड पंडित के साथ संगीत सीखा है और अच्छा गा सकता है। तो उसे गाने का मौका क्यों नहीं देना चाहिए? समस्या तब आती है जब आप अपने बेटे और बेटी के करियर को बढ़ाने के लिए जब उसमें काबिलियत नहीं है तब किसी और समर्थ मेरिट वाले लड़के और लड़की को आगे नहीं बढ़ने देते हैं । 
मुख्य वक्ता डेकिन यूनिवर्सिटी, आस्ट्रेलिया के फिल्म एवं टेलीविजन विभाग के निदेशक प्रोफेसर विक्रांत किशोर ने कहा "नेपॉटिज्म हर क्षेत्र में है। व्यापार में है, राजनीति में है, लेकिन बॉलीवुड को टारगेट किया जा रहा है। नेपोटिज्म को हिंदी में कुनबापरस्ती, भाई-भतीजावाद, कुल-पक्षपात, रिश्तेदारों के साथ मोहब्बत आदि कहा जा सकता है। भारत में नेपोटिज्म को देखें तो जाति व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा है जिसे नेपॉटिज्म से अलग नहीं किया जा सकता है। नेपोटिज्म एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ नेफ्यू या भतीजा है और यह संबंधी और अपने रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने से संबंधित है।"
सम्मानित अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय नोएडा केंद्र के पूर्व निदेशक प्रोफेसर बी. एस. निगम ने कहा "नेपॉटिज्म को फिल्म इंडस्ट्री के संपूर्णता में देखना चाहिए। फिल्म इंडस्ट्री में देखें तो नेपोटिज्म की शुरुआत मोनोपोली से होती है। गौर करें तो वैसे प्रोड्यूसर अब नहीं है जो फिल्म किसी मकसद के साथ प्रोड्यूस करते थे। जब फिल्म इंडस्ट्री ना होकर मकसद था और अब पूर्णतः फिल्म इंडस्ट्री बन गया है। इसमें फाइनेंसिंग बहुत बड़ा फैक्टर है। नेपोटिज्म, मोनोपोली और मनी ने इस क्षेत्र को अचरज भरा बना दिया है।"
वहीं अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी के मुख्य संरक्षक महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा "वैसे तो भाई -भतीजा वाद हर क्षेत्र में है लेकिन यह जितना व्यापक रूप से फिल्म इंडस्ट्री में है और जितने ज्यादा लोगों को प्रभावित करता है उतना किसी अन्य क्षेत्र में नहीं करता है। यदि कोई मेहनत करके परिवारिक पृष्ठभूमि के कार्यों को आगे बढ़ाता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए किंतु कोई योग्य ना होते हुए भी योग्य व्यक्तियों को आगे बढ़ने से रोके तो हमें ऐसे व्यक्तियों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए। सबसे पहले तो हमें फिल्म इंडस्ट्री में अपने आदर्श खोजना बंद करने होगा"

वेबीनार  में  निदेशक मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने  संगोष्ठी के उद्देश्यों व रूपरेखा पर चर्चा करते हुए इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के सभी अतिथियों का स्वागत व अभिनन्दन किया। 
कार्यक्रम का संचालन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. साकेत रमण ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील दीपक घोड़के ने दिया। मीडिया अध्ययन विभाग की परास्नातक विद्यार्थी पल्लवी सिंह और सनी मिश्रा ने वन्दे मातरम् प्रस्तुत किया। शोधार्थी मौसम जायसवाल ने माननीय कुलपति व प्रो. बी एस निगम का और प्रतीक्षा राम्य ने प्रोफेसर विक्रांत किशोर का संक्षिप्त जीवनवृत्त प्रस्तुत किया। परास्नातक छात्रा सुरभि सिंह ने श्री विवेक अग्निहोत्री के जीवन परिचय एवं उल्लेखित कार्यों का वर्णन किया।
अंतरराष्ट्रीय वेबीनार के आयोजन सचिव मीडिया अध्ययन विभाग के सह-प्रोफेसर डॉ. अंजनी कुमार झा, आयोजन सह-सचिव सहायक प्रोफेसर डॉ. परमात्मा कुमार मिश्रा और सह-संयोजक सहायक प्रोफेसर डॉ उमा यादव थीं। वेबीनार में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, जनसंपर्क अधिकारी श्रीमती शैफालिका मिश्रा, संगणक अनुभाग अधिकारी श्री दीपक दिनकर समेत अन्य कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी सम्मिलित रहे। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के 20 राज्यों के प्रतिभागी व मोरैक्को, रशियन फेडरेशन, मलेशिया, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया समेत 11 देशों प्रतिभागी सम्मिलित होने की सूचना है।