बांका: जिले की 5 विधानसभा सीटों में से तीन पर जदयू ने अपने उम्मीदवार दिए हैं, तो लोजपा ने भी इन तीनों ही सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर उन्हें ताल ठोकने के लिए भेज दिया है। कोई बड़ी बात नहीं कि लोजपा इस बार बांका जिले में एनडीए के चुनावी समीकरण खासकर जदयू प्रत्याशी वाले सीटों पर समीकरण को लेकर एक ताकतवर गेम चेंजर की भूमिका निभाने में कामयाब हो जाए।
लोजपा संगठन के सूत्रों के मुताबिक बांका जिले में लोजपा ने सबसे बड़ा गेम अमरपुर विधानसभा क्षेत्र में खेला है, जहां से मृणाल शेखर को टिकट देकर चुनाव लड़ने के लिए भेजा गया है। मृणाल शेखर बीजेपी के प्रमुख नेता रहे हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने 60 हजार से ज्यादा वोट लाए थे। इस बार वह फिर से अमरपुर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार थे।मृणाल शेखर ने क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहते हुए कार्यकर्ताओं के बीच खासी लोकप्रियता अर्जित की है। वह अमरपुर विधानसभा क्षेत्र के ही शंभूगंज प्रखंड के रहने वाले हैं। अमरपुर क्षेत्र के कांग्रेस एवं जदयू प्रत्याशी क्रमशः बांका एवं कटोरिया विधानसभा क्षेत्रों के रहने वाले हैं। चुनाव में इसका लाभ उन्हें मिल सकता है। लोजपा जिलाध्यक्ष बेबी यादव ने उन्हें लोजपा का टिकट दिए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि मृणाल शेखर अमरपुर, दीपक पासवान धोरैया और वे खुद बेलहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगी। और सभी ने नामांकन भी कर दिया है।। इन तीनों ही सीटों से जदयू के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
धोरैया क्षेत्र से जदयू के निवर्तमान विधायक मनीष कुमार ही पुनः पार्टी के प्रत्याशी बनाए गए हैं। जबकि बेलहर क्षेत्र में जदयू ने अपनी ही पार्टी के एमएलसी मनोज यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। अमरपुर क्षेत्र में जदयू के निवर्तमान विधायक जनार्दन मांझी की जगह इस बार उनके पुत्र जयंत कुमार को पार्टी का टिकट दिया है। इन तीनों ही सीटों पर लोजपा प्रत्याशी के चुनाव लड़ने की स्थिति में राजनीतिक समीकरण में बड़ा उलटफेर हो सकता है। इस समीकरण का असर जदयू के कार्यकर्ताओं के भितरघात के कारण जिले के कटोरिया एवं बांका विधानसभा क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है जहां से भाजपा प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
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