बांका (रजौन): स्टेशन रोड पुनसिया स्थित नहर किनारे पर अवस्थित डॉ जयप्रकाश मेहता के नर्सिंग होम में सोमवार की रात एसडीओ मनोज कुमार चौधरी के नेतृत्व में जांच की गई थी। जांच टीम में शामिल एसडीपीओ डीसी श्रीवास्तव,बीडीओ गुरुदेव प्रसाद गुप्ता,पुलिस इंस्पेक्टर राजेश कुमार, सीएचसी प्रभारी डॉ ब्रजेश कुमार सहित स्थानीय पुलिस पदाधिकारी थे।जांच के क्रम में मानक के अनुसार संसाधन नहीं मिलने,अनाधिकृत तरीके से नर्सिंग होम चलाने आदि के आरोप में नरसिंह होम को सोमवार की देर रात ही सील करते हुए डॉ अखिलेश कुमार एवं नर्स वृंदा देवी को हिरासत में ले लिया गया था।छापेमारी एवं जांच के क्रम में सात रोगी इलाजरत के रूप में भर्ती थी।नर्सिंग होम में धौरैया थाना अंतर्गत की एक कुमारी लड़की भी गर्भपात कराने के लिए भर्ती हुई थी।जिसे भागलपुर मायागंज रेफर करा दिया गया है।शेष नर्सिंग होम में भर्ती रोगियों को रजौन सीएससी से लेकर भागलपुर बांका शिफ्ट कराया गया था। इस मामले में मंगलवार को सीएचसी प्रभारी डॉ ब्रजेश कुमार के बयान पर मामला थाने में दर्ज कर ली गई है।दर्ज मामले में नर्सिंग होम संचालक जय प्रकाश मेहता,डॉ अखिलेश कुमार,नर्स वृंदा देवी और बाराहाट थानांतर्गत चंगेरी गांव के निवेदन कुमार को आरोपित किया गया है।सीएचसी प्रभारी ने दर्ज मामले में बताया है कि सरकारी मानक के विरुद्ध क्लीनिक में वाह्य कक्ष रोगी एवं शल्य क्रिया,प्रसव कक्ष,गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन कक्ष,सहित किसी भी रूप में चिकित्सक सरकारी मानक के अनुरूप नहीं थी।वार्ड परिसर में काफी गंदगियों का अंबार पड़ा हुआ था।थानाध्यक्ष बुद्धदेव पासवान ने बताया की वरीय अधिकारियों के दिशानिर्देश के बाद विधि संवत सुसंगत धाराओं के साथ मामला दर्ज करते हुए हिरासत में लिए गए डॉ अखिलेश कुमार एवं नर्स वृंदा देवी को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।डॉ अखिलेश कुमार ने रांची से एमबीबीएस की डिग्री 2006 में करने बात कही है।प्रमाणपत्र पत्र मांगने पर उपलब्ध नहीं कराया जा सका। नर्स वृंदा देवी ने नर्सिंग होम में 2006 से सेवा देने की बात कबूली है।एसडीओ के नेतृत्व में टीम द्वारा सोमवार की रात घंटों नर्सिंग होम में जांच किए जाने के मामले को लेकर प्रखंड सहित जिले के सभी प्राइवेट अनाधिकृत तरीके से नर्सिंग होम चलाने वाले में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है पुनसिया, रजौन से लेकर ग्रामीण इलाके के बामदेव, नवादा बाजार,राजावर मोड़, खिडडी हाट,,कोतवाली, तेरह माईल सहित कई ग्रामीण इलाकों में यह धंधा वर्षों से फल-फूल रहा है।



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