बांका में आयोजित बाल दरबार में बच्चों ने अपने सरोकारों व अधिकारों पर खुलकर की परिचर्चा

बांका : राष्ट्रीय बाल दिवस 14 नवंबर से लेकर विश्व बाल दिवस 20 नवंबर तक आयोजित होने वाले बाल अधिकार सप्ताह के तहत बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग एवं यूनिसेफ द्वारा जिला बाल संरक्षण इकाई एवं सहयोगी संस्था प्रथम के सहयोग से रविवार को जिला मुख्यालय के सभागार में बाल दरबार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के अलग-अलग तबकों से आए 32 बच्चे-बच्चियों एवं किशोर-किशोरियों ने हिस्सा लेते हुए अपनी समस्याओं, मुद्दों व अधिकारों को लेकर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से बच्चों ने बताया कि कोविड-19 त्रासदी, लॉकडाउन और स्कूल बंदी की वजह से उन्होंने शिक्षा, सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किन किन चुनौतियों का सामना किया, सरकार की किन योजनाओं से उन्हें लाभ मिला और कैसे एक बेहतर दुनिया का निर्माण किया जा सकता है। बाल दरबार कार्यक्रम में 16 वर्षीय पांचू कुमार चौधरी ने कहा कि बच्चों का विकास देश का विकास। इसी कड़ी में 16 साल की स्वाति प्रिया ने कहा कि हम बच्चे देश के भविष्य है हममे निवेश देश का हित है। चिंता, भय और अवसाद जैसी समस्याओं को चर्चा में शामिल करते हुए स्वाति प्रिया ने कहा कि बच्चों को पढ़ाओ देश को बचाओ। इस विशेष पहल के बारे में बताते हुए पटना से समाज कल्याण विभाग के निदेशक राजकुमार ने कहा कि जनता दरबार की तर्ज पर बाल दरबार से विभिन्न सरकारी विभागों तथा नीति निर्धारकों को बच्चों एवं किशोर-किशोरियों से सीधे संवाद कर उनके सरोकारों और सुझावों को बेहतर ढंग से जानने-समझने का मौका मिलेगा। इससे बच्चों के लिए, खासतौर से वंचित वर्ग के बच्चों के लिए बेहतर योजनाएं और कार्यक्रम बनाने में मदद मिलेगी। बाल दिवस की बधाई देते हुए पटना से यूनिसेफ बिहार के संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट बाल अधिकार समझौते एवं राष्ट्रीय बाल नीति के मुताबिक बच्चों को भागीदारी और विचार व्यक्त करने का अधिकार है। इस दिशा में समाज कल्याण विभाग ने बाल दरबार के माध्यम से पहली बार जिला में एक सशक्त और संवेदनशील प्लेटफॉर्म दिया जा रहा है, जो बेहद सराहनीय है. उम्मीद है कि इस संवाद को एक नियमित तथा सतत प्रक्रिया का स्वरूप दिया जाएगा, जिसके तहत बच्चों के मुद्दों और सुझावों पर यथोचित कार्रवाई से सम्बंधित संबद्ध अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ फॉलोअप भी हो सके। आज के बाल दरबार चर्चा के दौरान मुख्य तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सुरक्षा, सामाजिक योजना से सम्बंधित जागरूकता जैसे मुद्दे उभर कर आए, जिनसे उपस्थित सभी बच्चे-बच्चियां काफी प्रभावित हुए। 4 घंटे की इस कार्यक्रम के दौरान न सिर्फ समस्याओं पर बातचीत हुई, बल्कि बच्चों ने उनके निदान को लेकर कई ठोस सुझाव भी दिए, जिनमें बच्चों ने शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना व नए शिक्षकों की न्युक्ति, पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य की सुविधाएँ, अपने जिले व राज्य में रोजगार की उपलब्धता, बच्चों से सम्बंधित सुरक्षा व्यवस्था को दूरस्थ करना तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए जागरूकता से सम्बंधित सुझाव दिए। संवाद के दौरान मिले सुझावों के आधार पर प्रतिभागी बच्चे-बच्चियों द्वारा एक चार्टर ऑफ डिमांड्स भी तैयार किया गया, जिसे आगामी 18 नवंबर को वे जिलाधिकारी एवं अन्य अधिकारियों से मिलकर उन्हें सौंपेंगे। इस दौरान वे जिलाधिकारी से खुलकर चर्चा करेंगे और उनसे अपनी मांगों पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने का भी अनुरोध करेंगे। चर्चा के साथ-साथ बच्चों ने बाल दिवस को उत्सव के रूप में भी मनाया। बाल अधिकारों के प्रतीक के रूप में नीली रौशनी और नीले गुब्बारों से सजे हुए बाल गृह सह बालिका गृह और संस्थाओं में बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। जानकारी के अनुसार 14 से 16 नवंबर के बीच बिहार के 29 जिलों में राज्य बाल संरक्षण समिति, समाज कल्याण विभाग के निर्देशन में राज्य बाल संरक्षण समिति, सेव द चिल्ड्रेन, ऐक्शन एड, प्रथम, उदयन केयर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ऑल्टरनेटिव केयर की टीम के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इसमें राज्य के सभी 34 बाल व बालिका गृहों से भी बच्चे-बच्चियां शामिल होंगे। मालूम हो जनता दरबार की तर्ज पर शुरू किए गए इस पहल के जरिये बच्चों को एक प्रभावी मंच मुहैया करवाया जा रहा है, जहां वे अपने मुद्दों, समस्याओं और सरोकारों के बारे में आपस में खुलकर चर्चा कर सकें। इसी कड़ी में उन्हें जिलास्तरीय जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से खुलकर संवाद करने का भी मौका मिलेगा। संवाद के दौरान मिले बच्चों के सुझावों के आधार पर तैयार किए गए चार्टर ऑफ डिमांड्स को बच्चों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिला एवं राज्य स्तर पर संबद्ध अधिकारियों व नीतिनिर्धारकों को सौंपा जाएगा। जिला स्तरीय आयोजन के पश्चात हर जिले से एक लड़का या लड़की राज्य स्तर पर 19 नवंबर को आयोजित होने वाले राज्य बाल दरबार में भाग लेंगे। साथ ही 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस के अवसर पर बच्चों व किशोर-किशोरियों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा सुझावों एवं मांगों का संकलित चार्टर समाज कल्याण विभाग एवं अन्य संबद्ध विभागों के मंत्री एवं आला अधिकारियों को सौंपा जाएगा। कोविड महामारी के दौरान बच्चों ने क्या खोया, क्या पाया और उनके लिए एक बेहतर दुनिया कैसे बने, इससे जुड़े सुझावों को भी चार्टर ऑफ डिमांड्स में शामिल किया जाएगा।

रिपोर्ट:केआर राव 

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