चांदन प्रखंड में आठ साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म, औऱ हत्या मामले में बांका पोक्सो कोर्ट ने गिरफ्तार चारो आरोपी को

चांदन प्रखंड में आठ साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म, औऱ हत्या मामले में बांका पोक्सो कोर्ट ने गिरफ्तार चारो आरोपी को

बांका: प्रखंड मुख्यालय से होली के दिन आठ साल की एक मासूम बच्ची का अपहरण कर उसकी हत्या मामले में मात्र 19 माह में न्यायालय द्वारा सुनवाई पूरी करते हुए पूर्व से गिरफ्तार काराधीन आरोपी श्रीधर वर्णवाल उर्फ गोलू वर्णवाल,अजय वर्णवाल,डोमन पासवान औऱ पेंटर सागर सोनी को दोषी पाते हुए चारो को आजीवन कारावास की सजा के साथ 40-40 हजार का अर्थदंड सुनाया गया। जिस घटना के बाद से लगातार आंदोलन का किया  जाता रहा। साथ जिला सेवा प्राधिकार को पीड़ित परिवार को 15 लाख मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।



घटना के बाद कई नेता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे-
घटना के बाद कई बड़े नेता,चिराग पासवान,रितु जयसवाल,उपेंद्र कुशवाहा,पप्पू यादव, गिरिधारी यादव,मनोज यादव,रामदेव यादव,जयप्रकाश यादव,स्वीटी सीमा हेम्ब्रम भी उपस्थित हुए थे और सभी ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इस चार आरोपी के लिए न्यायालय में कुल 23 गवाह की गवाही हुई है जबकि दो अन्य आरपीएफ जवान पर मामला विचाराधीन है। जो इस मामले में अप्राथमिकी अभियुक्त थे। लेकिन फॉरेंसिक जांच के बाद इन दोनों को भी आरोपी बनाया गया था। घटना में बच्ची को एक टोटो से उठा कर ले जाया गया था। उसके बाद से उसकी खोज होती रही। उसी दिन रात के 10 बजे रेलवे स्टेशन के पास एक पुल के नीचे बालू से ढका हुआ बच्ची की लाश बरामद किया गया था। उसके बाद काफी आक्रोशित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपी को चांदन से जबकि एक आरोपी पेंटर सागर सोनी को जमुई जिले से गिरफ्तार किया गया था जहां वह अपना नाम बदल कर एक रिश्तेदार के घर रह रहा था। 
योगिता भयाना ने किया भरपूर समर्थन- इस घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना कई बार पीड़ित परिवार से मिलकर पूरे देश के कई भागों में केंडिल मार्च निकाला कर आंदोलन को आगे बढाने में सहयोग किया।

इस मामले में सरकार की ओर से लोक अभियोजक श्री प्रकाश पंडित अधिवक्ता, जबकि बचाव पक्ष की ओर से श्रीधर उर्फ गोलू की तरफ से आंनददेव चौधरी,अजय वर्णवाल की ओर से राम किशोर यादव,सागर सोनी पेंटर की तरफ से प्रमोद सिंह और डोमन पासवान की तरफ से मुकेश कुमार  नियुक्त थे।

मृतक की मां ने न्यायालय के इस निर्णय पर कहा कि जिस प्रकार उसकी बेटी को इस दरिंदों ने मारा था। जिसकी चीख हमे आज भी सुनाई पड़ती है। इसलिए उसे फांसी होनी चाहिए थी। पर न्यायालय का निर्णय स्वागत योग्य है।आज मेरी बेटी की आत्मा को शांति मिल गयी होगी।

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