भोपाल। सोमवार को रात 8 बजे राजधानी भोपाल के सबसे बड़े अस्पताल हमीदिया में शार्टसर्किट से बच्चो के वार्ड के वेंटीलेटर में आग लगने से 7 बच्चों की मौत हो गयी | 36 बच्चे अभी गंभीर हालत में बताये जा रहे हैं, इस हादसे में नर्स और वार्ड बॉय भी प्रभावित हुये हैं |
8 मंजिला इमारत में तीसरे फ्लोर जहां करीब 125 बच्चे भर्ती थे। आग लगने के बाद मची अफरातफरी में भी लोग अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बदहवास घूम रहे थे| बचाव कार्य के लिए भी पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं था |
इन मौतों के बाद भी सरकार झूठ बोलने से बाज नहीं आ रही, अस्पताल प्रबंधन व स्वास्थ्य मंत्री ने 4 बच्चों की मृत्यु की बात कही है जबकि मॉर्च्यूरी में 7 बच्चों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए लाया गया है। आंकड़े छुपाकर क्या हासिल करना चाहती है सरकार ?
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने इस पूरे हादसे को लापरवाही की वजह से हुयी हत्यायें करार दिया है क्योंकि अस्पताल की सुरक्षा को लेकर सरकार और अस्पताल प्रबंधन तनिक भी सचेत होता तो यह मौतें टाली जा सकती थीं। जैसी की खबर है कि अस्पताल में आग बुझाने के लिए लगे हाईड्रेंट बंद पड़े थे, 15 सालों से फायर एनओसी नहीं ली गयी थी।
कमाल की बात यह है कि इस बीच स्वास्थ्य मंत्री विश्वास सारंग 14 दिसम्बर 2020,24 मार्च 2021 और 8 मई 2021 को अस्पताल का दौरा कर चुके थे. अपने कार्यकाल में इस अस्पताल के कायाकल्प की डींगे हांक रहे थे। जाहिर है कि वे भी इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। खासतौर से तब जबकि आग लगने का प्रकरण जुलाई में भी हो चुका है फिर भी अग्निशामक यंत्र को ठीक करने की पहल नहीं की गयी।
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने मांग की है कि घटना की उच्च स्तर पर जांच कर दोषी प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाही की जाये ,.मृत बच्चों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाये , गंभीर हालत के बच्चों का दिल्ली भेजा जाना जरूरी हो तो वहां भी भेजकर मुफ्त इलाज किया जाये | अस्पताल के अग्निशामक यंत्र को तुरंत दुरुस्त किया जाये, अस्पताल पर समुचित बजट खर्च कर वेंटिलेटर , जांच मशीन बेड व स्टाफ की व्यवस्था की जाये |