रजौन, बांका : भागलपुर-दुमका मुख्य सड़क मार्ग में जिले के रजौन प्रखण्ड अंतर्गत मोरामा-बनगांव पंचायत के श्रीमन्नारायण धाम बनगांव में पिछले 37 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे 38वां श्री सीताराम विवाह महोत्सव मंगलवार को ब्रज होली एवं रामकलेवा के साथ सम्पन्न हो गया। 38वें महोत्सव के नवमें दिन दिवा सत्र में मथुरा-वृंदावन से पधारे श्री बाल कृष्ण लीला संस्थान के स्वामी श्याम सुंदर शर्मा के निर्देशन में रासलीला एवं रामलीला मंडली के कलाकारों द्वाराभक्ति चरित्र के भक्त गोपाल कथा प्रसंग की प्रस्तुति हुई, जिसे देख श्रद्धालु काफी भावुक हो गए। मालूम हो कि डीएन सिंह महाविद्यालय भुसिया, रजौन के सेवानिवृत्त प्राचार्य सह विद्वान कथा प्रवक्ता डॉ. महेश प्रसाद सिंह उर्फ महेशानंद जी महाराज एवं समस्त ग्रामीणों के सहयोग से हर वर्ष रंगोत्सव होली त्योहार से पूर्व नौ दिनों तक आयोजित होने वाला श्रीसीताराम विवाह महोत्सव का 38वां वार्षिकोत्सव अखंड हरिनाम संकीर्तन के साथ सोमवार 7 मार्च से शुभारंभ हुआ था। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी महोत्सव में मथुरा-वृंदावन के रासलीला एवं रामलीला मंडली के कलाकारों द्वारा लगातार नौ दिनों तक दिन में रासलीला तथा रात्रि में श्रीसीताराम विवाह महोत्सव की जीवंत प्रस्तुति की गई। इस नौ दिवसीय महोत्सव के दौरान वृंदावन के कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति, विद्वान प्रवक्ताओं द्वारा मानस प्रवचन तथा श्रीराम चरित मानस का सामूहिक नवाह्न परायण, कथा, मंगलआरती से यहाँ का माहौल भक्तिसागर में डूबा रहा। इस महोत्सव के दौरान भागलपुर, बांका सहित पूर्वी बिहार एवं पड़ोसी झारखंड राज्य के देवघर, दुमका, गोड्डा आदि स्थानों से प्रतिवर्ष यहां धर्म प्रेमी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ी। इस महोत्सव के आयोजनकर्ता डॉ. महेश प्रसाद सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह महोत्सव कराने की प्रेरणा उन्हें आध्यात्मिक जगत में बक्सर वाले मामा जी के नाम से प्रसिद्ध पूज्य संत नारायण दास भक्तमाली महाराज द्वारा आयोजित श्रीसीताराम विवाह महोत्सव से मिली थी, डॉ. श्री सिंह उनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने महोत्सव स्थल का नाम अपने गुरुदेव पूज्य संत नारायण दास के नाम पर श्रीमन्नारायण धाम रखा और 1984 से वे प्रतिवर्ष इस महोत्सव का आयोजन करा रहे हैं और जब तक ये शरीर साथ देगा कराते रहेंगे। आगे उन्होंने बताया कि उनके गुरुदेव भी यहाँ तीन बार आ चुके हैं और साथ ही इस स्थान पर महोत्सव के दौरान शंकराचार्य, स्वामी शैलेन्द्रानंद, स्वामी दिव्यानंद तीर्थ, स्वामी निरंजनदेव तीर्थ से लेकर साध्वी अखिलेश्वरी सहित कई अन्य जाने-माने विद्वतजनों का आगमन हो चुका है। डॉ. श्री सिंह ने बताया वर्ष 2008 में इसी महोत्सव के दौरान यहां सर्वधर्म सम्मेलन का भी आयोजन हो चुका है, जिसमें कई धर्मों के धर्मगुरुओं का जमावड़ा लगा था। इस महोत्सव के दौरान वर्ष 2018 से 2020 तक लगातार तीन वर्षों तक नौ दिवसीय महारुद्र यज्ञ का भी आयोजन हो चुका है। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक डॉ. महेश प्रसाद सिंह के पुत्र पीयूष कुमार ने बताया कि महोत्सव के दौरान वृंदावन से पधारे श्री बालकृष्ण लीला संस्थान द्वारा स्वामी श्याम सुंदर शर्मा जी के निर्देशन में प्रतिदिन दिन के सत्र में दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक रासलीला एवं रात्रि सत्र में 9 बजे से 12 बजे तक श्रीसीताराम विवाह महोत्सव के मंचन के साथ-साथ साधु संतों द्वारा प्रवचन कार्यक्रम का दौर लगातार जारी रहा। महोत्सव के दौरान लगने वाले मेले में मुख्यरूप से तारामांची, झूला, रेल गाड़ी, ब्रेक डांस, खेल तमाशे के साथ-साथ हर तरह की छोटी-बड़ी दुकानें जैसे खानपान सम्बंधित होटल, महिलाओं के लिए श्रृंगार प्रशाधन की दुकानें एवं बच्चों के खिलौने इत्यादि की दुकानों के साथ-साथ महोत्सव स्थल के समीप विभिन्न तरह के देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमा श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही। वहीं इस महोत्सव को सफलता पूर्वक सम्पन्न कराने में श्रीसीताराम सेवा ट्रस्ट एवं यज्ञ समारोह समिति के अध्यक्ष अजीत कुमार राव, उपाध्यक्ष भानू भारती, सचिव रितेश कुमार सिंह, मंच संचालक अरुण कुमार सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, सुभाष प्रसाद सिंह, वीरेंद्र उर्फ बादल सिंह, धनंजय प्रसाद सिंह, मनोज कुमार सिंह, मनीष कुमार, अमर कुमार सिंह सहित सभी ग्रामवासियों का काफी सरहानीय योगदान रहा।
रिपोर्ट:केआर राव
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