बीपीएनपीएसएस (मूल) की बैठक में छह सूत्री मांगों को लेकर हुआ विचार विमर्श

बीपीएनपीएसएस (मूल) की बैठक में छह सूत्री मांगों को लेकर हुआ विचार विमर्श

रजौन, बांका: रजौन-धौनी बीआरसी परिसर में प्रखंड पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ मूल की बैठक प्रखंड अध्यक्ष जयशंकर कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को अपराह्न 2 बजे से रखी गई थी। प्रखंड पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ मूल की आयोजित बैठक में नियोजित शिक्षकों को 4 माह से वेतन नहीं मिलने आदि से संबंधित 6 सूत्री मांगों पर विचार विमर्श किया गया। 6 सूत्री मांगों में से पहला मांग लगातार चार महीना से बकाया वेतन को भुगतान करने, हड़ताल अवधि का वेतन शीघ्रता शीघ्र उपलब्ध कराने, मातृत्व अवकाश एवं चिकित्सा अवकाश का बकाया वेतन भुगतान करने क्या लाभ है जनवरी माह 2022 का वेतन 15 प्रतिशत एरियर के साथ भुगतान करने, नव प्रशिक्षित शिक्षकों का एरियर भुगतान करने आदि का मांग रखा गया था। बैठक में उपस्थित शिक्षक संघ के अध्यक्ष जयशंकर कुमार, सचिव सुभाष कुमार सिन्हा, उप सचिव श्यामसुंदर ठाकुर सहित शिक्षक संघ के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार के आवंटन के बाद भी नियोजित शिक्षकों को प्रतिमाह समय पर वेतन नहीं मिलना अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना कार्य है। बीपीएनपीएसएस मूल शिक्षक संघ के अधिकारियों ने बताया अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना हरकत से बाज नहीं आने की स्थिति में शिक्षक संघ अधिकारियों के विरुद्ध आंदोलन तेज करेगी। बैठक में शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष, सचिव, उप सचिव श्यामसुंदर ठाकुर के अलावे शिक्षक संघ के नेता अमरेंद्र कुमार सिंह, कुमार गौरव, अमित कुमार, वीरेंद्र कुमार, प्रदीप कुमार, शैलेश कुमार सुधांशु, राकेश, आदित्य कुमार, जय कांत यादव, दीक्षित कुमार, मोहम्मद अफ़सारुल हक, विपिन कुमार साह, रवि रंजन दुबे, कुंज बिहारी कुंज, मुकेश कुमार यादव, ललित कुमार सहित शिक्षक संघ के काफी संख्या में नेता एवं शिक्षक आदि उपस्थित थे। लगातार चार महीना से नियोजित शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने की स्थिति में शिक्षक संघ के नेताओं में शिक्षा अधिकारियों के विरुद्ध काफी रोष देखा जा रहा था। शिक्षक संघ के अधिकारियों ने बताया बांका में शिक्षा अधिकारियों द्वारा नियोजित शिक्षकों के साथ वेतन मामले में नाइंसाफी कर रही है। जिस कारण नियोजित शिक्षकों को लगातार 4 माह से वेतन नहीं मिलने की स्थिति में शिक्षक भूखे मरने एवं जिल्लत की जिंदगी जीने के लिए विवश है।

रिपोर्ट:केआर राव 

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