*मिश्रदेशोद्भवाम्लेच्छाः काश्यपेनैव शासिताः ….. शिखासूत्रं समाधाय पठित्वा वेदमुत्तमम् यज्ञैश्च* *पूजयामासुर्देवदेवं शचीपतिम् ….. अहं लोकहितार्थाय जनिष्यामि कलौयुगे* ….. *कीकटे देशमागत्य ते सुरा जज्ञिरे क्रमात् वेदनिन्दां पुरस्कृत्य बौद्धशास्त्रमचीकरन् …..*
*👉वेदनिन्दाप्रभावेण ते सुराः 👉कुष्ठिनोभवन् ….. विष्णुदेवमुपागम्य तुष्टुवुर्बौद्धरूपिणम् ‼️*
(भविष्य पुराण)|
*👉कलियुग के आने पर मिस्र देश में उत्पन्न कश्यप गोत्रीय म्लेच्छों ने शिखा रख कर तथा जनेऊ धारण करके स्वयं को 👉ब्राह्मण घोषित कर दिया तथा स्वयं भी वेदपाठ करते हुए देवताओं का पूजन करने तथा 👉कराने लगे इससे त्रस्त होकर देवताओं ने देवराज इंद्र के समक्ष जाकर समाधान हेतु निवेदन किया देवराज ने उनकी प्रार्थना पर उन 👉असुर म्लेच्छों को मोहित करने के लिए 👉बौद्धमार्ग का विस्तार करके वेदों कि निंदापरक ग्रंथों को लिखने के लिए बारहों आदित्य के साथ कीकट में अवतार लिया वेदनिन्दा करने के कारण उन्हें 👉कुष्ठ हो गया अतः वे समस्त देवगण*
*👉बुद्धरूपधारी विष्णु जी के पास गए जिन्होंने अपने योगबल से उनका रोगनाश किया तो वस्तुतः बुद्ध का आगमन सनातन धर्म के अंदर जिन म्लेच्छों ने घुसपैठ कर रखी थी, उनके विनाश के लिए हुआ था ‼️*
*👇👇श्रीमद्भागवत में भी वर्णन है👇👇*
*धर्मद्विषां निगमवर्त्मनि निष्ठिताना…वेषं विधाय बहुभाष्यत औपधर्म्यं”*
*तथा “ततः कलौ सम्प्रवृत्ते सम्मोहाय सुरद्विषाम् ।*
*बुद्धो नाम्नाजिन सुतः, कीकटेशु भविष्यति”।।*
*👉असुरों को मोहित करने के लिए बुद्ध का अवतार हुआ था सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य आदि का उपदेश देने के*
*👉कारण उन्हें अधार्मिक तो नहीं कहा जा सकता, परन्तु वेद तथा ईश्वर निंदक होने के कारण वे धार्मिक भी नहीं कहलाये ❗ अतः उन्हें*
*👉उपधार्मिक कहा गया है ‼️*
*👉कुछ अन्य जन यह बात भी करते हैं कि वस्तुतः विष्णु के अवतारों में पहले बलराम तथा कृष्ण को अलग अलग गिना गया था तथा बाद में आदि गुरु शंकराचार्य जी ने बलराम को हटा कर बुद्ध को सम्मिलित कर दिया लेकिन इसका कोई प्रमाण न आदिशंकराचार्य जी के किसी ग्रन्थ में में मिलता है और न ही वर्तमान में किसी शांकरपीठ के पास इसका प्रमाण है साथ ही कभी शंकराचार्य जी ने भी नहीं कहा कि*
*👉बुद्ध विष्णु के अवतार नहीं थे और न ही दलाई लामा इसे अस्वीकार करते हैं हाँ, इस बात के कई प्रमाण अवश्य हैं कि तंत्रग्रंथों तथा पुराणों में शंकराचार्य जी के आगमन से बहुत पूर्व से ही*
*👉विष्णु भगवान के बौद्धावतार की बात कही गयी थी ❗*
*👉 और श्रीमद्भागवत आदि कई ग्रन्थों में बलराम जी को अवतारों की सूची से हटाये बिना ही बौद्धावतार का उल्लेख है ‼️*
*ऐसे ही प्रमाण*
*👉देवीभागवत, विष्णु पुराण, स्कन्द पुराण, नृसिंह पुराण आदि में भी प्राप्य हैं ❗*
*अस्तु 👉 अब लोग बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार तो स्वीकार कर लेंगे परन्तु यह कहेंगे कि यहाँ तो कीकट प्रान्त में अजिन के पुत्र के रूप में वर्णन हैं ❗*
*👉 फिर हम गौतम को क्यों माने कि वे बुद्ध थे और भगवान के अवतार थे ❓*
*👉 इसका प्रमाण भी पुराणों में प्राप्त होता है 👇*
*एतस्मिनैव काले तु कलिना संस्मृतो हरिः ❗*
*काश्यपादुद्भवो देवो गौतमो नाम विश्रुतः ❗*
*बौद्धधर्मं समाश्रित्य पट्टणे प्राप्तवान्हरिः ‼️*
(भविष्य पुराण)
*👉कलियुग की प्रार्थना पर काश्यप गोत्र में भगवान विष्णु ने गौतम के नाम से अवतार लेकर बौद्धधर्म का विस्तार करते हुए पटना चले गये ❗😀*
*👉पुनः लोग यह शंका करेंगे कि हमें राजा शुद्धोदन का भी नाम चाहिये, तो इसका प्रमाण भी उपलब्ध होता है ‼️👇👇👇*
*👉शुद्धोदनस्तमालोक्य महासारं रथायुतैः ❗*
*प्रावृतं तरसा मायादेवीमानेतुमाययौ* …. *बौद्धा शौद्धोदनाद्यग्रे कृत्वा तामग्रतः पुनः ❗*
*योद्धुं समागता म्लेच्छकोटिलक्षशतैर्वृताः ❗*
*(कल्कि पुराण])*
*👉इस प्रसंग में वर्णन है कि जब कल्कि जी बौद्धों और म्लेच्छों का विनाश करने लगेंगे तो बुद्ध, उनके पिता शुद्धोदन तथा माता मायादेवी पुनः प्रकट होंगे तथा म्लेच्छों के साथ* *👉मिलकर कल्कि जी से युद्ध करेंगे ❗*
*👉इसी युद्ध के वर्णन के अंतर्गत वर्णन है कि जब शुद्धोदन हार कर मायादेवी को बुलाने चला गया तो बौद्धों ने शुद्धोदन के पुत्र का आश्रय लेकर लाखों करोड़ों म्लेच्छों कि सहायता से युद्ध करना आरम्भ किया ❗*
*इस प्रकार से सभी प्रमाणों को एक साथ देखा जाय तो बुद्ध कई हैं, तथा सभी अवतार ही हैं जो उद्देश्य विशेष से यथासमय आते हैं ❗*
*👉यदि प्रकाश में व्यक्ति हत्या कर रहा हो तो जान बचाने वाला अन्धकार कर देता है ❗*
*👉 वैसे ही जब धर्म का नाम लेकर म्लेच्छों में ब्राह्मण बन कर अधर्म प्रारम्भ किया तो उन्हें ठीक करने के लिए भगवान ने बुद्ध के रूप में आकर कहा कि जिस ईश्वर और धर्म के नाम पर तुम ये सब कर रहे हो, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है ❗*
*बाद में जयदेव कवि आदि ने भी कारुण्यमातान्वते, निन्दसि यज्ञविधे, सदय पशुघातम् आदि शब्दों के द्वारा इसी बात को प्रमाणित किया कि* *श्रीहरि का ही अवतार भिन्न भिन्न समयों में बुद्ध को रूप में हुआ था ❗*
*वर्तमान में कथित नवबौद्ध आदि बुद्ध के मूल सिद्धांत को न जानने के कारण घोर अनर्थ करते हैं ❗*
*👉 क्योंकि बुद्ध ने फोड़े को काट कर हटाया और शेष को सुरक्षित किया लेकिन कथित बौद्धगण स्वस्थ देह का गला ही काट दे रहे हैं वस्तुतः यह सब कुछ पूर्व नियोजित था कि सनातन में घुसपैठ किये म्लेच्छों को नास्तिक बौद्ध दर्शन का आश्रय लेकर विष्णु भगवान भ्रमित करके उन्हें सनातन से वापस दूर करेंगे तथा इस प्रक्रिया में जो भी कुछ सनातनियों में भ्रम व्याप्त होगा उसे बाद में उचित अवसर पाकर कुमार कार्तिकेय तथा भगवान शिव क्रमशः*
*आचार्य कुमारिल भट्ट तथ आदिगुरू शंकराचार्य के रूप में आकर ठीक करेंगे ❗*
*तो निष्कर्ष यह निकलता है कि बुद्ध निःसंदेह नारायण के अवतार हैं तथा उनका उद्देश्य तथा कर्तव्य सही था ❗*
*👉 बुद्ध सही थे,👉 बौद्ध नहीं ❗*
*आगे हरि इच्छा प्रभु की🌹🙏🌷🌷🙏🌹🌹*
*✍️ ज्योतिषाचार्य पंडित भरत भूषण पाण्डेय*
