*पेड़ की सबसे ऊँची डाली पर लटक रहा नारियल रोज नीचे नदी मेँ पड़े पत्थर पर हंसता और कहता।*
*" तुम्हारी तकदीर मेँ भी बस एक जगह पड़े रह कर, नदी की धाराओँ के प्रवाह को सहन करना ही लिखा है, देखना एक दिन यूं ही पड़े पड़े घिस जाओगे।*
*मुझे देखो कैसी शान से उपर बैठा हूं? पत्थर रोज उसकी अहंकार भरी बातोँ को अनसुना कर देता।*
*समय बीता एक दिन वही पत्थर घिस घिस कर गोल हो गया और विष्णु प्रतीक शालिग्राम के रूप मेँ जाकर, एक मन्दिर मेँ प्रतिष्ठित हो गया ।*
*एक दिन वही नारियल उन शालिग्राम जी की पूजन सामग्री के रूप मेँ मन्दिर मेँ लाया गया।*
*शालिग्राम ने नारियल को पहचानते हुए कहा " भाई . देखो घिस घिस कर परिष्कृत होने वाले ही प्रभु के प्रताप से, इस स्थिति को पहुँचते हैँ।*
*सबके आदर का पात्र भी बनते है, जबकि अहंकार के मतवाले अपने ही दभं के डसने से नीचे आ गिरते हैँ।*
*तुम जो कल आसमान मे थे, आज से मेरे आगे टूट कर, कल से सड़ने भी लगोगे, पर मेरा अस्तित्व अब कायम रहेगा भगवान की दृष्टि मेँ मूल्य.. समर्पण का है . अहंकार का नहीं।*
*जो सत्य के मार्ग पर चलते हैं, जिनकी कथनी और करनी में समानता होती है, जो अपने आचरण और कार्यशैली से समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं ऐसी आत्माओं को समाज में हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, प्राणवान, प्रतिभाशाली, संवेदनशील, देशभक्त आत्माओं को इनसे प्रेरणा मिलते रहती है समाज और राष्ट्र के कल्याण में ऐसी ही आत्माओं की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है‼️*
*आपके संपूर्ण मनोकामना पूर्णता और सर्व साफल्यता लिए श्री महादेव से हमारी नित्य विशेष प्रार्थना, आपके सुखी दांपत्य जीवन की हार्दिक शुभकामना...*
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*
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*ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*शुभम बिहार यज्ञ ज्योतिष आश्रम*
(अहर्निशं सेवा महे)
*!!भवेत् सर्वदा शुभ मंगलम्!!*
