सांसद का ससुराल विकास से दूर,नाराज है लोग

सांसद का ससुराल विकास से दूर,नाराज है लोग

बांका:चांदन प्रखंड के बिरनिया पंचायत अंतर्गत प्रखंड मुख्यालय से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित गोपडीह गांव बांका सांसद गिरधारी यादव का ससुराल है। लेकिन पूरे पंचायत में इस गांव की अपेक्षा सबसे अधिक हुई है। लोगों को यह भरोसा था कि कई बार विधायक और सांसद रहने के बाद यह गांव निश्चित रूप से विकास करेगा। लेकिन इस गांव की इतनी अपेक्षा होगी यह किसी ने सोचा भी नहीं था। इस गांव में आने जाने के लिए एक ढंग की सड़क भी नहीं है। वर्ष 13 में इस गांव तक जाने के लिए एक पक्की सड़क बनाई गई थी। लेकिन 10 वर्षों के बाद उसकी मरम्मत का काम भी नहीं हो सका। जिस कारण इस सड़क पर अलकतरा तो दूर गिट्टी भी अब लगभग समाप्त हो गई है। जिससे मोटरसाइकिल का आना-जाना भी मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर गड्ढे हो गए हैं। और सड़क पूरी तरह खराब हो गई है। इतना ही नहीं इस गांव में कई वर्ष पूर्व नल जल योजना भी शुरू की गई थी। लेकिन करीब डेढ़ वर्षो से वह पूरी तरह सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गया है। मामूली खराबी के कारण यह पानी देने में और असमर्थ है जिस कारण लोगों के दरवाजे पर लगाया गया पाइप भी अब टूटने फूटने  लगा है। इस गांव के आंगनबाड़ी भवन कीचड़ युक्त खेत में बनाया गया है लेकिन आज भी अधूरा ही पड़ा हुआ है। बारिश के दिनों में केंद्र तक जाना काफी मुश्किल होता है। जबकि गांव में एक किसान भवन भी बनाया गया है जिस पर सांसद के साले का दखल कब्जा है, और वह उसे घरेलू उपयोग में रखता है और चाबी उसी के पास रहती है। इसका उपयोग गांव का कोई भी आदमी आज तक नहीं कर सका है। जबकि इस गांव में भूमिहार के अलावे दलित परिवार की संख्या भी काफी अधिक है। जिसके लिए सरकार बराबर योजनाएं लाती हैं। लेकिन सांसद का ससुराल होने के बावजूद इस गांव को काफी उपेक्षित रखा गया है। इस गांव के ग्रामीण सुनील राय का कहना है कि हम लोगों की जाति देखकर गांव की उपेक्षा हुई है । यहां आज तक किसी भी तरह का विकास नहीं हुआ है। गांव तक आने के लिए सड़क और पीने के लिए पानी भी हम लोगों को नहीं मिल रहा है। जबकि हरेंद्र कुमार राय का कहना है कि इस गांव पर सांसद का कोई ध्यान नहीं है इसलिए यह गांव उपेक्षित है ।वरना अगर एक सांसद चाहे तो गांव  को चमन बन सकता है। इसी गांव के उत्तम कुमार राय का कहना है कि यह गांव सदा से उपेक्षित रहा है, एक सड़क बनी थी जो अब गड्ढे में तब्दील हो गई है। यहां आने के लिए लोगों को काफी मेहनत करना पड़ता है। अगर समय पर सड़क की मरम्मत कर दी जाती तो आज यह दुर्दशा नहीं होती। जबकि ग्रामीण रेखा देवी का कहना है कि हम लोगों को लगा था कि अब इस गांव का दामाद सांसद बन गया है इसलिए कम से कम अपने ससुराल के विकास के लिए निश्चित रूप से काम करेगा। लेकिन हम लोगों के आशा पूरी तरह निराश में बदल गई, और आज तक कोई विकास


नहीं हो सका जिससे पूरा गांव निराशा है।

Post a Comment

0 Comments