गांधी जयंती: कुलपति ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के तीन मंत्रों को दिलाया याद

गांधी जयंती: कुलपति ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के तीन मंत्रों को दिलाया याद


गया। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के  प्रशासनिक भवन परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी  की 154 वीं जयंती के शुभ अवसर पर  2 अक्टूबर को एक सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, विद्यार्थी एवं कर्मचारियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्प अर्पित कर याद किए।  वहीं सभा को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय  कुलपति एवं मुख्यवक्ता प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने  कहाँ की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आजादी के प्रणेता थे। भारत में वह आज भी उतना ही  प्रासंगिक है , जितना वह पहले थे। आज देश में जो कुछ हो रहा है , वह सब महात्मा गांधी के बताए हुए रास्ते के अनुसार हो रहा है । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मंत्र थे : स्वराज, स्वदेशी, स्वालंबन । इन तीनों बातों को लेकर देश में काम चल रहा है । सबका साथ सबका विकास हो रहा है। 
स्वराज तो हम लोग हासिल कर लिए हैं। हम अपने कर्तव्यों के साथ अपने स्वराज को चला रहे हैं। स्वराज का अर्थ अपने दायित्व का बोध है।  जीवन में स्वालंबन बहुत ही महत्वपूर्ण है । कोरोना के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का आवाहन किया था । लेकिन आत्मनिर्भर भारत तभी   सफल होगा । जब व्यक्ति अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर हो। आत्मनिर्भर का पाठशाला खुद से भोजन बनाने से शुरू होता है। अपने जीवन में रोजमर्रा की जो वस्तुओं का इस्तेमाल करते हैं। वह बाहरी कंपनियों के द्वारा निर्मित वस्तुएं होती हैं। लेकिन हमें स्वदेशी को अपना कर देश को स्वदेशी के मामले में समृद्ध किया जा सकता है।वहीं सभा में डॉ. पवन मिश्रा,डॉ. किशोर कुमार, नेहा शुक्ला ,संतोष कुमार एवं  विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों के तमाम विद्यार्थी एवं कर्मचारी आदि उपस्थित रहें।

 रिपोर्ट प्रस्तुत प्रधान संपादक के आदेश के अनुसार  चम्पारण नीति समाचार संपादक : के आर राव

Post a Comment

0 Comments