पंकज सिंह की रिपोर्ट
संग्रामपुर ( मुंगेर ) बिहार सरकार के द्वारा चलाए जा रहे सततजीवीको उपार्जन योजना सिर्फ कागज पर सिमट कर रहता हुआ नजर आ रहा है बताते चले की योजना का शुरुआत बिहार सरकार के द्वारा उसे वक्त किया गया था जबकि बिहार में पूर्णता शराबबंदी लागू हो चुका था ताजा मामला जिले के संग्रामपुर प्रखंड के बताया जा रहा है यहां पर संग्रामपुर प्रखंड में लगभग 450 से अधिक अत्यंत गरीब परिवार का चयन किया गया था व्यवसाय को अच्छी तरह से चलाने को लेकर के उन्हें कई तरह का प्रशिक्षण भी करवाया गया है ताकि गरीब परिवार अच्छी तरह से व्यवसाय करके अपना भरण पोषण कर सके प्रत्येक परिवार को 33 से 37 हजार रुपए का राशि उपलब्ध करवाया गया है इस पैसा से दुकान एवं बकरी पालन बकरी खरीद कर दिया जाता है दुकान वाले लाभार्थी को दुकान का सामान खरीद करके दिया जाता है इसको देखरेख करने के लिए कई तरह के कर्मी को भी बहाल किया गया है पंचायत लेवल एवं प्रखंड लेवल पर भी पदाधिकारी को रखा गया है इतना ही नहीं इनको आगे बढ़ाने के लिए बंधन से भी एक प्रखंड लेवल का स्टाफ को रखा गया लेकिन पंचायत एवं प्रखंड लेवल के पदाधिकारी के उदासीनता के कारण प्रखंड में सतत जीविको कोपार्जन योजना मुंह चिढ़ाते हुए नजर आ रहा है प्रखंड में सतत जीविकोपार्जन योजना के द्वारा खुलवाए गए दुकान में से 50 से 60% दुकान बंद पड़ा हुआ है बकरी पालन कर रहे सदस्यों का बकरी मर चुकी है 25 से 30% दे दी ऐसी भी है जिसके पास जीविका के दुवारा दिया हुआ कुछ भी नहीं हैँ इससे स्पष्ट जाहिर होता है कि बिहार सरकार के द्वारा चलाए जा रहे योजना को बिफल करने मे कोई कसर नहीं छोड़ रहा हैँ

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